प्रियंका गांधी के राजनीतिक सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम को कांग्रेस पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रमोद कृष्णम को पार्टी से निकालने का पत्र जारी करते हुए उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करने का आरोप लगाया है।
हालांकि, माना जा रहा है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने की जुगत भिड़ा रहे हैं। 19 फरवरी को कल्कि धाम में होने वाले शिलान्यास के लिए भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई भाजपा नेताओं को आमंत्रित किया है, जबकि इसी कार्यक्रम के लिए उन्होंने कांग्रेस नेताओं को नहीं बुलाया। इसे उनकी राजनीतिक पैंतरेबाजी के रूप में देखा जा रहा है। संभवतः यही कारण है कि कांग्रेस ने समय रहते उन्हें पार्टी से निकालने का संदेश दिया है।
भाजपा में जाने के पीछे उनकी राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा बताई जाती है। कहा जा रहा है कि वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की संभल या किसी आसपास की सीट से चुनाव में उतर सकते हैं। हालांकि, अभी तक न तो भाजपा की तरफ से इस तरह का कोई बयान आया है, और न ही आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ऐसी कोई बात कही है। लेकिन माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसी सीट से मैदान में उतार सकती है।
विवाद में क्यों?
आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस के बहुत बड़े चेहरे भले न रहे हों, लेकिन एक हिंदू धर्म गुरु के कारण उनकी काफी प्रतिष्ठा है। वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक हिस्से को प्रभावित करते हैं। चूंकि, भाजपा इस बार किसी भी कीमत पर उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटें जीतकर एक रिकॉर्ड बनाने की कोशिश कर रही है, जयंत चौधरी और आचार्य प्रमोद कृष्णम जैसे नेता उसकी इन कोशिशों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।
पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने राजनाथ सिंह के खिलाफ लखनऊ से चुनाव भी लड़ा था। वे तीसरे स्थान पर रहे थे और करीब 1.80 लाख वोट हासिल किया था। समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार पूनम सिन्हा के होने के बाद भी इतना वोट हासिल कर पाना कांग्रेस के साथ-साथ आचार्य प्रमोद कृष्णम के लिए भी बड़ी उपलब्धि थी। इसलिए उनके राजनीतिक महत्त्व को खारिज नहीं किया जा सकता।
प्रियंका के कारण कांग्रेस में पिछड़े
आचार्य प्रमोद कृष्णम को कांग्रेस में प्रियंका गांधी का समर्थक माना जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि कांग्रेस में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बीच राजनीतिक रस्साकशी है। कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेता आपसी तनातनी को हमेशा खारिज करते रहे हैं, लेकिन माना जाता है कि सोनिया गांधी के इशारे पर राहुल गांधी को कांग्रेस में प्रमोट किया जाता है, जबकि प्रियंका गांधी को ज्यादा असरदार होने के बाद भी पीछे रखा जाता है। माना जाता है कि प्रियंका की कांग्रेस में इसी कमजोरी के कारण आचार्य प्रमोद कृष्णम पार्टी में ज्यादा सफल नहीं हो पाए।
उन्होंने कभी सीधे तौर पर गांधी परिवार पर हमला नहीं किया, लेकिन पार्टी के कई नीतिगत फैसलों पर कड़ा प्रहार करते रहे। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कांग्रेस नेताओं के न शामिल होने पर उन्होंने कड़ा हमला किया था और इसे राम विरोधी और जनता विरोधी कदम करार दिया था।
कांग्रेस में हिंदू विरोधी इकट्ठे हो गए
कृष्णम ने हमेशा यह आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी के आसपास कुछ ऐसे लोग इकट्ठे हो गए हैं जो हिंदुत्व के खिलाफ बोलने को ही राजनीति समझते हैं। लेकिन उन्हें लगता है कि हिंदू बहुल देश भारत में कभी हिंदुओं के खिलाफ बोलकर राजनीति नहीं की जा सकती। उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का स्वागत किया और इसे युग परिवर्तनकारी कदम बताया था। उनका मानना है कि कांग्रेस की इस दुर्गति का सबसे बड़ा कारण यही है कि वह हिंदुओं के समर्थन वाली राजनीति नहीं कर रही है। उसकी मुस्लिम तुष्टीकरण वाली छवि उस पर भारी पड़ रही है।