प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व सूफी सम्मेलन में शिरकत करते हुए दो टूक कहा कि आतंकवाद और धर्म के बीच कोई रिश्ता नहीं है। आतंकवाद को धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। आतंक से लड़ाई मानवता और अमानवीयता के बीच संघर्ष है। आतंकी अपने ही देश और अपने ही लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं। अजान और प्रार्थना की जगहों पर हमले किए और ऐसे वक्त में सूफीवाद एक नूर की तरह है, जो हिंसा से सहमी दुनिया को एक रोशनी दिखा सकती है। इस्लाम शांति का धर्म है और सूफी पंथ इसकी आत्मा है।
अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने सूफी पंथ से जुड़ी महान हस्तियों बुल्ले शाह, अमीर खुसरो, हजरत निजामुद्दीन औलिया और बाबा फरीद को याद किया। उन्होंने कहा कि सूफी पंथ से जुड़े इन संतों ने मानवता से प्रेम करने का मंत्र दिया। पीएम ने बताया कि 2015 में ही 90 से अधिक देशों ने आतंकी हमले झेले।
कुछ लोग ऐसे हैं जिनकों कैंप लगाकर आतंकी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई का नारा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, हमारा लक्ष्य सबका साथ सबका विकास है। भारत के प्रति प्यार हमें अमीर खुसरो से अधिक किसी ने नहीं दिखाया। उन्होंने कहा, वसुधैव कुटुंबकम में हमारा विश्वासृ है। हम सब एक परिवार की तरह है।