बता दें कि पिछले सात-आठ माह से जम्मू-कश्मीर में 'गुपकार' समूह की राजनीतिक गतिविधियां देखने को नहीं मिल रही थीं। इस माह एकाएक वहां पर सक्रियता देखने को मिली है। 'गुपकार' समझौते में शामिल नेता अब खुलकर बोलने लगे हैं। 'नेशनल कांफ्रेंस' और 'पीडीपी', जम्मू-कश्मीर की परीसीमन प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। हालांकि ये नेता यह बात भी कह रहे हैं कि केंद्र को कश्मीरियों का दिल जीतना है तो उन्हें वह सब कुछ लौटाना होगा जो पांच अगसत 2019 को कश्मीरियों से छीना गया है। इससे पहले 'गुपकार' समूह के नेता अनुच्छेद 370 को लेकर सरकार का बहिष्कार करने की मुद्रा में रहे हैं।
अब्दुल्ला का कहना था कि जब तक जम्मू-कश्मीर में पुरानी व्यवस्था यानी अनुच्छेद 370 की बहाली नहीं हो जाती है, तब तक वे केंद्र सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे। चूंकि अब जम्मू-कश्मीर में परीसीमन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए राजनीतिक दलों से बातचीत की जाएगी। 'नेशनल कॉन्फ्रेंस' और 'पीडीपी' जैसे दलों ने परीसीमन प्रक्रिया में शामिल होने का मन बना लिया है। सबसे पहले पीएजीडी के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला इसके लिए तैयार हुए थे। सूत्रों का कहना है कि गुपकार की ताजा बैठक इसलिए बुलाई गई थी, क्योंकि अब्दुल्ला, परीसीमन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए दूसरे सहयोगियों का मन जानना चाह रहे थे। अगर गुपकार के बाकी नेता इसके लिए तैयार नहीं होते तो अब्दुल्ला भी परीसीमन प्रक्रिया का बहिष्कार कर देते।
पिछले दिनों जब मनोज सिन्हा दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे, तो कथित तौर से गुपकार में शामिल नेताओं द्वारा यह अफवाह फैला दी गई कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर का विभाजन करने जा रही है। जम्मू को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की तैयारी हो रही है। हालांकि बाद में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता और ब्रिगेडियर (रिटा.) अनिल गुप्ता ने बताया, सबसे पहले यह देखें कि पीएम की बैठक की खबर कहां से आई है। दिल्ली में अधिकारिक तौर किसी ने यह बात नहीं की है। पीडीपी से यह खबर बाहर निकली है। महबूबा मुफ्ती की तरफ से कहा गया कि वे इस बैठक में शामिल होंगी। इसका क्या मतलब हुआ। अगर गुपकार के नेता पीएम की बैठक में शामिल हो रहे हैं तो उन्होंने 'अनुच्छेद 370' को समाप्त करने का समर्थन कर दिया है। इससे पहले तो वे यही कह रहे थे कि अनुच्छेद 370 को खत्म किए बिना वे बातचीत नहीं करेंगे। अब सरकार ने तो कह दिया है कि अनुच्छेद 370 को वापस नहीं लिया जाएगा।
वहीं प्रधानमंत्री के साथ अगर बैठक होती है तो दो मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। एक, अमरनाथ यात्रा का मुद्दा है। जम्मू से जुड़े कई धार्मिक संगठन जैसे विहिप, शिवसेना व बजरंग दल आदि यह मांग कर रहे हैं कि सुरक्षित यात्रा शुरू की जाए। सरकार ने इस पर फैसला नहीं लिया है। हो सकता है कि पीएम मोदी इस मामले में जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों से बात करें। उन्हें विश्वास में लेकर अमरनाथ यात्रा शुरू की जाए। दूसरा मुद्दा, जम्मू-कश्मीर के विकास को लेकर है। अभी वहां पर विकास के कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। आगे विकास को किस तरह से गति प्रदान की जाए, राजनीतिक दलों से इस सम्बंध में राय ली जा सकती है।