बदल रहा हमले का पैटर्न
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में शनिवार चार मई को आतंकवादियों ने भारतीय वायुसेना के एक काफिले पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें एक जवान शहीद हो गया जबकि चार अन्य सैनिक घायल हो गए थे। सूत्रों ने बताया कि यह आतंकी हमला शाम करीब सवा छह बजे किया गया, जब आठ से 10 कर्मियों वाला भारतीय वायुसेना का काफिला पुंछ जिले में जारनवाली से शाहसीतार के पास अपने बेस पर लौट रहा था। रक्षा सूत्रों के मुताबिक पिछले पिछले दो सप्ताह में पुंछ और राजौरी में यह तीसरा आतंकी हमला था। उन्होंने बताया कि अभी तक के आंकलन के मुताबिक पिछले कुछ आतंकी हमलों को देखें, तो आतंकियों का हमला करने का पैटर्न बदल रह है। वे अब उन जगहों को चुन रहे हैं, जहां सड़क चौड़ीकरण का काम हो रहा है, जहां सड़कें संकरी है, आसपास घने जंगल और तीव्र मोड़ हों, जहां ड्राइवर को वाहन की रफ्तार जबरन धीमी करनी ही पड़ती है। वह बताते हैं कि वे उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरने वाले सैन्य वाहनों की भी रेकी कर रहे हैं। हमला करके भाग जाने में घने जंगलों का फायदा मिलता है।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि इन सब के अलावा आतंकी समय और खराब मौसम पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं। हालिया पुंछ हमला शाम सवा छह बजे अंधेरा होने के वक्त किया गया। जिस जगह ये हमला वहां तीव्र मोड़ था और वहां बीआरओ-ग्रीफ सड़क निर्माण का काम कर रही है। आसपास निर्माण सामग्री का मलबा फैला हुआ था, जिसकी वजह से काफिले की रफ्तार धीमी हुई और उसी समय दो से तीन आतंकवादियों ने बगल की पहाड़ी से गोलीबारी शुरू कर दी। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, खुफिया जानकारी से पता चलता है कि राजौरी-पुंछ बेल्ट में 10-15 प्रशिक्षित आतंकवादी सक्रिय हैं, जो सैन्य काफिले की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं ताकि इस इलाके से गुजरने वाले सुरक्षा बलों पर घात लगा कर हमला किया जा सके।
बीआरओ बना रहा है यहां फोर लेन सड़क
दरअसल सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ लाइन ऑफ कंट्रोल से सटे इलाकों में सैन्य अवागमन को आसान बनाए रखने के लिए सड़क निर्माण और चौड़ीकरण का काम कर रहा है। जम्मू-पुंछ-राजौरी सड़क मार्ग लगभग 250 किमी लंबा है, जिसे एनएच 144ए भी कहा जाता है। फिलहाल यह डबल लेन सड़क है, जो जम्मू से शुरू होकर राजौरी और पुंछ जिलों तक जाती है। इस परियोजना से पुंछ-राजौरी और जम्मू के बीच यात्रा का समय मौजूदा 6-7 घंटे से घटकर 4.5 घंटे रह जाएगा।
रक्षा सूत्रों का कहना है कि वाहन यातायात में भारी वृद्धि और लगातार हो रहीं सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए जम्मू-अखनूर खंड को चार-लेन राजमार्ग में अपग्रेड करने और फिर अखनूर से पुंछ तक इसके चौड़ीकरण की जरूरत महसूस की गई। इसके अलावा, स्थानीय लोग भी लंबे समय से सड़क चौड़ीकरण की मांग कर रहे थे। सरकार ने जम्मू और अखनूर के बीच राजमार्ग को फोर लेन करने का लक्ष्य मार्च 2025 निर्धारित किया है। वहीं प्रोजेक्ट संपर्क के तहत अखनूर से राजौरी और फिर आगे पुंछ तक शेष 200 किलोमीटर की दूरी पर सड़क चौड़ीकरण का काम बीआरओ कर रहा है। चूंकि राजमार्ग का यह हिस्सा पीर पंजाल पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसमें कई जगहों पर तीखे मोड़ भी हैं, जिसका फायदा उठा कर आतंकवादी सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं।
एनएच-144ए पर बना रहे सुरक्षा बलों को निशाना
सूत्रों का कहना है कि 21 दिसंबर 2023 को हुए हमले में भी आतंकियों ने इसी पैटर्न का इस्तेमाल किया था। राजौरी में डेरा की गली और बुफलियाज के बीच हुए हमले को अंजाम देने से पहले आतंकवादी पहले पहाड़ी के ऊपर चढ़े और फिर वहां से सेना के वाहनों पर स्टील की बुलेट से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
सूत्रों का कहना है कि जिस जगह हमला हुआ, वहां भी आसपास घने जंगल थे। आतंकियों ने जानबूझ कर धत्यार मोड़ को चुना, क्योंकि यह अंधा मोड़ है और उबड़-खाबड़ सड़क के चलते यहां वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है। वह कहते हैं कि यहां भी वही पैटर्न रहा। सड़क निर्माणाधीन थी और मलबा फैला हुआ था। एक सड़क निर्माण में लगा डंपर डेल्टा कंपनी की 48 आरआर की जिप्सी और 2.5 टन के आर्मी ट्रक के सामने आ गया और जैसे ही डंपर ने रिवर्स किया, आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
सूत्रों का कहना है कि पिछले साल ही जी-20 की बैठक से पहले पुंछ के भाटादुड़ियां के नजदीक एनएच-144ए पर भिंबर गली इलाके में हुए हमले में भी आतंकियों ने यही तरीका इस्तेमाल किया था, भारी बारिश और लो विजिबिलिटी का फायदा उठाकर आतंकियों ने घात लगाकर हमले को अंजाम दिया। सड़क के उबड़-खाबड़ होने बारिश और ओलावृष्टि की वजह से बेहद फिसलन थी, जिसके चलते वाहन की रफ्तार बेहद धीमी और आतंकियों ने पहाड़ी के ऊपर से सामने से निशाना बनाया। ये तीनों ही जगह लगभग 40 किमी के दायरे में आते हैं, जो घने जंगलों और एनएच-144A से जुड़े हैं।
स्थानीय लोगों का मिल रहा साथ
रक्षा मामलों के जानकार विक्रम जीत सिंह का कहना है कि आतंकवादियों के लिए सेना की गतिविधियों पर नजर रखने वालों में स्थानीय लोगों की भूमिका बेहद अहम होती है। वह कहते हैं कि 21 दिसंबर, 2023 को सुरक्षा बलों पर हुए आतंकी हमले की हमले की जगह और भागने के रास्तों की पूरी मैपिंग इस इलाके की जानकारी रखने वाले स्थानीय लोगों ने की थी। इसमें एक ओवर ग्राउंड वर्कर शौकत को 2022 में आतंकवादियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 48 आरआर ने हिरासत में लिया था, और उसने खुलासा किया था कि वह उस समय वहां बकरियां चरा रहा था।
रक्षा सूत्रों का कहना है कि राजौरी में 16 कोर मुख्यालय में ब्रिगेडियर की अध्यक्षता में बुलाई गई सेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (सीओआई) में 48 राष्ट्रीय राइफल्स (गढ़वाल राइफल्स) ने जो सबूत पेश किए थे, उसमें बताया गया था कि एंबुश एरिया के नजदीक स्थित टोपा पीर मोहल्ले के तीन स्थानीय लोगों को वहां देखा गया था। आतंकवादियों ने सेना की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें इसकी सूचना देने के लिए तैनात किया था।
हालांकि, इस मामले में 48 राष्ट्रीय राइफल्स ने तीनों ओवर ग्राउंड वर्कर्स से पूछताछ की थी, जिसका 'मिर्च' वाला वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद 48 आरआर को वहां से हटा दिया गया था और उसकी जगह 61 आरआर को तैनात किया गया था। सूत्रों का कहना है कि अगर स्थानीय लोग न शामिल हों, तो आतंकियों के लिए एक दिन भी जिंदा रहना नामुकिन है क्योंकि ओजीडब्ल्यू ही उन्हें रहने की जगह और भोजन इत्यादि उपलब्ध कराते हैं।
पीओके में सक्रिय 30 से 40 आतंकी ले रहे ट्रेनिंग
रक्षा सूत्रों ने बताया कि बर्फ पिघलते ही एलओसी से हथियारों से लैस आतंकी लॉन्च पैड की तरफ बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या लश्कर के आतंकियों की है। वहीं घाटी में चुनाव भी गर्मियों में हैं और आतंकियों की पूरी तैयारी है कि उन्हें डिस्टर्ब किया जाए। सूत्रों का कहना है कि गुरेज के सामने तैयबा लॉन्च पैड, दुधनियाल, लीपा, काबुसा, धुंधक, सुदंरबनी के सामने समोहानी, भिंभर, मच्छल सेक्टर के सामने तेजियान और नौकोट इलाके में लश्कर के आतंकियों की मौजूदगी देखी गई है।
इसके अलावा एलओसी पर जैश के आतंकियों की मौजूदगी भी है। सरदारी लॉन्च पैड के पास जैश की आतंकियों की गतिविधियां दिखाई दी हैं। पुंछ के सामने कोपरा लॉन्च पैड और कृष्णाघाटी के सामने मुगल मौहल्ले में लश्कर के लगभग सात आतंकी हैं। इसके अलावा पुंछ के पास पोथा से सात किमी उत्तर पूर्व में सिंदाराह में चार से छह आंतकियों की उपस्थिति बताई जाती है। वहीं 40 से 50 आतंकी इस समय शिंकियार में ट्रेनिंग ले रहे हैं और लोकसभा चुनाव या जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें सीमापार से घाटी में धकेला जा सकता है।
13 अप्रैल को पीओके के मुफ्फराबाद में हुई थी बैठक
रक्षा सूत्रों ने बताया कि 13 अप्रैल को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडरों के साथ बैठक की थी। बैठक में इस बात पर सहमति पर बनी कि बर्फ पिघलते ही जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ बढ़ाई जाए और ड्रोन के जरिए ज्यादा से ज्यादा हथियारों और ड्रग्स की खेपों की सप्लाई की जाए। साथ ही, लोकसभा चुनावों के दौरान सुरक्षा बलों और नेताओं को निशाना बनाया जाए।