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सियासत: राहुल और प्रियंका ने प्रशांत किशोर से क्यों की मुलाकात, क्या है इस मेलजोल का राज

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 13 Jul 2021 08:24 PM IST

सार

क्या राहुल गांधी केंद्र सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी का लाभ लेना चाहते हैं? उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और कांग्रेस पार्टी को भी संजीवनी की जरूरत है। बंगाल विधानसभा चुनाव ने प्रशांत किशोर का भी कद बढ़ाया है।
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प्रियंका और राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई

एक बार फिर कांग्रेस प्रशांत किशोर से नजदीकियां बढ़ा रही है। मंगलवार को पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी ने प्रशांत किशोर से भेंट की है। हालांकि प्रशांत किशोर पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार का काम छोड़ चुके हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि राहुल और प्रियंका ने प्रशांत किशोर से क्यों मुलाकात की?

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने 2017 में प्रशांत किशोर की सलाह से उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में झंडा फहराने का निर्णय लिया था। पीके की सलाह पर ही समाजवादी पार्टी से गठबंधन भी किया था, लेकिन पूरा राजनीतिक आपरेशन फ्लॉप रहा था। 



कांग्रेस को ऑक्सीजन चाहिए, प्रशांत किशोर को बैनर
कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव कहते हैं कि जब किसी को प्यास लगती है तो वह कुआं ढूंढ़ता है। सूत्र का कहना है कि उन्हें नहीं पता गांधी और किशोर में क्या बात हुई? यह वहीं बता पाएंगे, लेकिन इस समय दोनों को एक दूसरे की जरूरत है। पूर्व महासचिव का कहना है कि देश में जनता के भीतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार और भाजपा की राज्य सरकारों के खिलाफ बहुत नाराजगी है। 



यह नाराजगी बिना राजनीतिक विकल्प बने नहीं भुनाई जा सकती। अनुमान है कि राहुल गांधी ने इसी तरह के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रशांत किशोर के साथ बैठे हैं। प्रशांत किशोर भी राजनीति में आना चाहते हैं। वह पिछले दिनों शरद पवार के साथ कुछ दौर की चर्चा कर चुके हैं। इस तरह का विषय प्रशांत किशोर का भी हो सकता है।  

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प्रियंका और राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई
एक बार फिर कांग्रेस प्रशांत किशोर से नजदीकियां बढ़ा रही है। मंगलवार को पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी ने प्रशांत किशोर से भेंट की है। हालांकि प्रशांत किशोर पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार का काम छोड़ चुके हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि राहुल और प्रियंका ने प्रशांत किशोर से क्यों मुलाकात की?

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने 2017 में प्रशांत किशोर की सलाह से उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में झंडा फहराने का निर्णय लिया था। पीके की सलाह पर ही समाजवादी पार्टी से गठबंधन भी किया था, लेकिन पूरा राजनीतिक आपरेशन फ्लॉप रहा था। 

कांग्रेस को ऑक्सीजन चाहिए, प्रशांत किशोर को बैनर
कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव कहते हैं कि जब किसी को प्यास लगती है तो वह कुआं ढूंढ़ता है। सूत्र का कहना है कि उन्हें नहीं पता गांधी और किशोर में क्या बात हुई? यह वहीं बता पाएंगे, लेकिन इस समय दोनों को एक दूसरे की जरूरत है। पूर्व महासचिव का कहना है कि देश में जनता के भीतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार और भाजपा की राज्य सरकारों के खिलाफ बहुत नाराजगी है। 



यह नाराजगी बिना राजनीतिक विकल्प बने नहीं भुनाई जा सकती। अनुमान है कि राहुल गांधी ने इसी तरह के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रशांत किशोर के साथ बैठे हैं। प्रशांत किशोर भी राजनीति में आना चाहते हैं। वह पिछले दिनों शरद पवार के साथ कुछ दौर की चर्चा कर चुके हैं। इस तरह का विषय प्रशांत किशोर का भी हो सकता है।  

कांग्रेस में हैं प्रशांत किशोर के कई मुरीद, अन्य दलों में भी कम नहीं

राजनीतिक दलों में बात करें तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का प्रशांत किशोर पर भरोसा बढ़ा है। विधानसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर ममता बनर्जी के सलाहकारों में गिने जाते हैं। राज्य सरकार के गठन के बाद पिछले दिनों भी प्रशांत किशोर ने ममता बनर्जी से भेंट की थी। बैठक और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई थी। प्रशांत किशोर के मुरीद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी भी हैं। रेड्डी की राय के बाद ही ममता ने प्रशांत किशोर की सेवाएं ली थीं।

इसी तरह से कांग्रेस पार्टी के भीतर कैप्टन पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी हैं। प्रियंका वाड्रा की टीम की एक सदस्य भी प्रशांत किशोर द्वारा उत्तर प्रदेश में 2016 में शुरू किए गए प्रयास की तारीफ करना नहीं भूलतीं। राहुल गांधी के सचिवालय में सक्रिय सदस्य के अनुसार राहुल गांधी भी प्रशांत किशोर को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में मुख्य भूमिका देने के बाद लोकसभा चुनाव 2019 तक जोड़े रखने के पक्ष में थे। हालांकि कतिपय कारणों से ऐसा नहीं हो सका।

कांग्रेस के लिए 2022 करो या मरो जैसा 

राहुल गांधी के बाद प्रियंका गांधी भी सक्रिय राजनीति में उतर चुकी हैं। उन्होंने 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में बहुत समय दिया है। प्रियंका लगातार योगी सरकार पर हमला बोलती रहती हैं, लेकिन अभी तक प्रियंका गांधी का कोई राजनीतिक करिश्मा नहीं दिखाई दिया। यहां तक कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के भीतर भी कोई उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है। जबकि प्रियंका गांधी को मिशन-2022 के लिए ही राजनीति में उतारा गया था।

कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी हलकों और रणनीतिकारों में इसकी सबसे बड़ी चिंता है। समझा जा रहा है कि यह चिंता प्रियंका गांधी को भी है। इसके अलावा पंजाब और उत्तराखंड में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि इस बाबत एक दशा व दिशा पर चर्चा के लिए ही प्रशांत किशोर के साथ यह अहम बैठक हुई है। कांग्रेस के लिए 2022 करो या मरो की तरह है। वह इसका सामना इसी तर्ज पर करना चाहती है।

बिना कांग्रेस के प्रभावी विपक्ष मुश्किल

प्रशांत किशोर भी मानते हैं कि वर्तमान परिस्थिति में बिना कांग्रेस के प्रभावी विपक्ष की कल्पना मुश्किल है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत विपक्ष के तमाम नेता इससे इनकार नहीं करते। प्रशांत किशोर इस समय तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, राष्ट्रीय मंच समेत कई राजनीतिक दलों को सलाह दे रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर भी किसी खास मकसद से राहुल गांधी से मिलने के इच्छुक थे। ऐसा माना जा रहा है कि राहुल गांधी, पीके और प्रियंका के बीच हुए इस विमर्श का जल्द ही कोई राजनीतिक नतीजा सामने आ सकता है।
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