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राजनीति: आखिर मायावती क्यों नहीं मिलीं दानिश अली से! राहुल-अजय राय का मिलना और सपा का ट्वीट कह रहा यह कहानी

आशीष तिवारी
Updated Thu, 28 Sep 2023 08:59 PM IST

सार

भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने बसपा सांसद कुंवर दानिश अली के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की। इस टिप्पणी के बाद ज्यादातर विपक्षी दल दानिश अली के साथ खड़े हुए। लेकिन इस विवाद के बाद अब तक बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती और उनकी पार्टी के सांसद की मुलाकात नहीं हो पाई है।
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दानिश अली - फोटो : amar ujala

 

भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने बसपा सांसद कुंवर दानिश अली के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की। इस टिप्पणी के बाद ज्यादातर विपक्षी दल दानिश अली के साथ खड़े हुए। लेकिन इस विवाद के बाद अब तक बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती और उनकी पार्टी के सांसद की मुलाकात नहीं हो पाई है। अपनी नेता से मुलाकात ना होने पर बहुजन समाज पार्टी के सांसद कुंवर दानिश अली ने अमर उजाला डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि यह बात सच है कि मायावती से उनकी मुलाकात नहीं हुई है। वह कहते हैं कि उनकी पार्टी के नेता ने उनके साथ हुए इस घटनाक्रम के बाद ट्वीट किया है। रही बात मिलने की तो दानिश अली कहते हैं कि हर नेता की अपनी एक शैली होती है लेकिन मायावती का समर्थन उनके साथ है। हालांकि सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की हो रही है कि बसपा और दानिश अली के बीच में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है।

 

चर्चाओं पर क्या बोले और क्यों बोलें: सांसद

हालांकि सियासी गलियारों में चर्चाए इस बात की सबसे ज्यादा हो रही है कि दानिश अली आने वाले लोकसभा के चुनाव में किसी दूसरे सियासी दल से राजनीतिक मैदान में ताल ठोक सकते हैं। सियासी घटनाक्रम पर नजर रखने वाले राजनैतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरह से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की सांसद पत्नी डिंपल यादव ने उनको भाई कह कर संबोधित किया उससे राजनीतिक गलियारों में कुछ और तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा इस बात की भी हो रही है कि कहीं दानिश अली को समाजवादी पार्टी अपने साथ जोड़कर चुनाव लड़ाने की तैयारी तो नहीं कर रही है।इस बारे में पूछे जाने पर सांसद दानिश अली कहते हैं कि वह इस तरीके के सियासी चर्चाओं पर किसी तरीके का कोई जवाब नहीं देना चाहते। हालांकि सीधे तौर पर यह पूछे जाने पर क्या आने आने वाले चुनाव में अपनी पार्टी बदलेंगे ? कांग्रेस या INDIA गठबंधन के हिस्से बनकर चुनाव लड़ेंगे तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया और कहा कि इन चर्चाओं में कोई दम नहीं है।

 

यह भी लग रहे हैं कयास

2019 में बसपा के दानिश अली ने अमरोहा से पहली बार चुनाव लड़ा। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह तंवर भी भारी मतों से हराया था। जिसके बाद वह अमरोहा के मुस्लिम और दलितों के लिए नया चेहरा बनकर सामने आए। अब चर्चाएं इस बात की हैं कि जिस तरह से सपा ने दानिश अली के समर्थन में आगे आकर मुस्लिम मतदाताओं में एक संदेश देने की कोशिश की है। उसका काउंटर ही कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का उनके आवास पर जाने से जोड़ा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी तो पहले ही उनसे मिलने चले गए थे। राजनैतिक जानकार डीपी त्रिपाठी कहते हैं कि मायावती का अपने सांसद से इतने बड़े घटनाक्रम के बाद न मिलना, राहुल गांधी और अजय राय उनके घर जाकर मिलना। फिर सपा के अध्यक्ष और उनकी सांसद पत्नी का ट्वीट करना एकदम सामान्य सियासी घटना नहीं है। इसके पीछे कई तरह के सियासी दलों के अपने अपने एजेंडे शामिल ही है। क्योंकि दानिश अली के माध्यम से मुस्लिम मतदाताओं को संदेश देने की होड़ मची है।

 

दर्द और तकलीफ में सब साथ खड़े: दानिश 

बसपा सांसद दानिश अली कहते हैं कि फिलहाल जिस तरीके से सियासी दलों ने उनका समर्थन किया है वह उनको तकलीफ की इस घड़ी में बहुत संयम देने वाला है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसद को इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए तो सम्मानित भी कर दिया है। वह कहते हैं कि भाजपा ने तो अपने सांसद के खिलाफ कोई कारवाई तक नहीं की। वह कहते हैं कि उनसे जो भी नेता मुलाकात कर रहा है या उनके समर्थन में खड़ा हो रहा है, दरअसल वह संसद में बोली गई सत्ता पक्ष के सांसद की अभद्र भाषा शैली और उक्त सांसद के खिलाफ की जाने वाली कारवाई की मांग को लेकर है। 

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