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Agniveer: 'अग्निवीर' पर मची रार, विपक्ष पर मोदी का वार; क्या नौसेना/वायु सेना के लिए 'झटका' थी अग्निपथ योजना

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 26 Jul 2024 06:02 PM IST

सार

कारगिल दिवस पर पीएम मोदी को इस मामले में बयान देना पड़ा। उन्होंने कहा, जो लोग देश के युवाओं को गुमराह कर रहे हैं, उनका इतिहास साक्षी है कि उन्हें सैनिकों की कोई परवाह नहीं है। ये वही लोग हैं, जिन्होंने 500 करोड़ रुपए दिखाकर 'वन रैंक वन पेंशन' पर झूठ बोला था।
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अग्निपथ योजना पर सियासत। - फोटो : अमर उजाला


बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहली जुलाई को राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अग्निवीरों का मुद्दा उठाया था। बतौर नेता प्रतिपक्ष, राहुल ने अग्निवीरों को लेकर सरकार पर कड़ा प्रहार किया था। उसके बाद विपक्ष के दूसरे नेताओं ने भी अग्निवीरों पर आवाज बुलंद की। राहुल गांधी ने कहा था, अग्निवीर, लैंडमाइन ब्लास्ट में शहीद होता है तो मैं उसे शहीद कह रहा हूं, मगर भारत सरकार उसे शहीद नहीं कह रही है। एक शहीद को पेंशन मिलेगी और शहीद का दर्जा भी मिलेगा, दूसरे को यह सब नहीं मिलेगा। उसके बाद केंद्र सरकार भी इस मुद्दे पर सक्रिय नजर आई। सरकार ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के महानिदेशकों को मैदान में उतारा। इन महानिदेशकों ने 'अग्निवीर' को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर अपना वीडिया संदेश जारी किया। उस संदेश में कहा गया कि 'पूर्व-अग्निवीरों' को आयु सीमा में रियायत और पीईटी से छूट के साथ बल में शामिल करने के लिए वे बेहद उत्साहित हैं। ये महत्वपूर्ण कदम सुरक्षाबलों को मजबूती देगा। पूर्व अग्निवीरों को सीएपीएफ में 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा। 


उसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी, इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे। कर्नल चौधरी ने अग्निवीरों के लिए तय किए गए आरक्षण फार्मूले पर भी सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा, मोदी सरकार 15 साल के प्रशिक्षित जवान को नौकरी नहीं दे पा रही, तो महज 4 साल के प्रशिक्षित अग्निवीर को नौकरी कैसे दे सकेगी। क्या 10वीं पास अग्निवीर युवा 4 साल बाद किसी सरकारी नौकरी का पेपर पास कर पाएगा। इन सबके एक बार फिर से अग्निवीरों के मन में सवाल उठने लगे। वे सोचने लगे कि सेना से बाहर जाने के बाद उन्हें कहां पर और कैसे नौकरी मिलेगी। नतीजा, केंद्र सरकार ने इस सप्ताह दोबारा से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के महानिदेशकों को मैदान में उतार दिया। ये महानिदेशक, 24 दिन में दूसरी बार सीएपीएफ में अग्निवीरों के लिए 10 फीसदी आरक्षण, इस विषय पर बयान देने के लिए सामने आए। 


कारगिल दिवस पर पीएम मोदी को इस मामले में बयान देना पड़ा। उन्होंने कहा, जो लोग देश के युवाओं को गुमराह कर रहे हैं, उनका इतिहास साक्षी है कि उन्हें सैनिकों की कोई परवाह नहीं है। ये वही लोग हैं, जिन्होंने 500 करोड़ रुपए दिखाकर 'वन रैंक वन पेंशन' पर झूठ बोला था। ये हमारी सरकार है, जिसने ‘वन रैंक वन पेंशन’  लागू किया है। पूर्व सैनिकों को सवा लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की धन राशि दी गई है। ये वही लोग हैं जिन्होंने आजादी के सात दशक बाद भी शहीदों के लिए ‘वॉर मेमोरियल’ नहीं बनाया। ये वही लोग हैं, जिन्होंने सीमा पर तैनात हमारे जवानों को पर्याप्त ‘बुलेटप्रूफ’  जैकेट्स भी नहीं दी थीं।


पीएम के इस बयान पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भी झूठ बोला है। उनका कहना है कि अग्निपथ/अग्निवीर योजना सेना द्वारा शुरू की गई थी, जबकि जनरल एमएम नरवाने, जो उस समय सेना प्रमुख थे, ने लिखा है कि यह योजना सेना के लिए पूरी तरह से आश्चर्यचकित करने वाली और नौसेना एवं वायु सेना के लिए 'एक झटके' की तरह थी। पीएम का कहना है कि पेंशन बिल को मैनेज करने का अग्निपथ की शुरुआत से कोई लेना-देना नहीं है। यह उन सबके विपरीत है जो सरकारी प्रवक्ता, सैन्य विशेषज्ञ और रक्षा मामलों पर टिप्पणी करने वाले पिछले दो वर्षों से बताते आ रहे हैं। सभी यह बात मान रहे थे कि भारत सरकार के पेंशन बिल को मैनेज करने की मुख्य वजह अग्निपथ/अग्निवीर ही है। अब मोदी कह रहे हैं कि यह सच नहीं है। यह बिल्कुल आश्चर्यजनक है कि स्वघोषित परमात्मा के अवतार कैसे जवाबदेही से बचने की कोशिश करते है। भारत के लोगों ने उन्हें 4 जून, 2024 को पहचान लिया है। यह स्पष्ट भी है कि वह और अधिक आत्म-भ्रमित होते जा रहे हैं। 


राहुल गांधी ने कहा था, अग्निवीर, लैंडमाइन ब्लास्ट में शहीद होता है तो मैं उसे शहीद कह रहा हूं, मगर भारत सरकार उसे शहीद नहीं कह रही है। एक शहीद को पेंशन मिलेगी और शहीद का दर्जा भी मिलेगा, दूसरे को यह सब नहीं मिलेगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल की इस बात पर कहा था कि वे गलत बयानबाजी कर रहे हैं। राहुल ने अग्निवीरों को सेवा के दौरान ग्रेज्युटी के अलावा अन्य लाभ न मिलने और उनके परिवार को पेंशन से वंचित करने की आलोचना की थी। नेता प्रतिपक्ष का दावा था कि सरकार अग्निवीरों को इस्तेमाल करके उन्हें फेंक देने वाले मजदूर के रूप में देखती है। उन्हें शहीद का दर्जा भी नहीं देती। कर्नल चौधरी ने कहा, डीजीआर रिपोर्ट, जून 2021 के अनुसार, देश में पूर्व सैनिकों के 95 प्रतिशत (7.70 लाख) आरक्षित पद खाली क्यों पड़े हैं। जब मोदी सरकार 15 साल के प्रशिक्षित जवान को नौकरी नहीं दे पा रही है तो महज 4 साल की सेवा के बाद रिटायर होने वाले प्रशिक्षित अग्निवीर को नौकरी कैसे देगी। बतौर कर्नल रोहित चौधरी, केंद्र सरकार अग्निवीर को फिजिकल व मेडिकल में छूट देने की बात कर रही है, लिखित परीक्षा में क्यों नहीं। 


क्या लिखित परीक्षा में पूर्व सैनिक व अग्निवीर जवान मिनिमम पासिंग मार्क्स 40 प्रतिशत ला सकते हैं। यहां पर एक अहम सवाल यह भी है कि देश में शहीद हुए 15 अग्निवीरों में से 9 केस सुसाइड व संदिग्ध हालात में मौत के क्यों हैं। ये बहुत भयावह स्थिति है कि एक साल के अंदर 15 अग्निवीर शहीद हो चुके हैं। बतौर चौधरी, 9 से ज्यादा केसों में अग्निवीरों की सुसाइड व संदिग्ध हालात में मौत हुई है। सेना में अग्निवीर जवान लगातार सुसाइड क्यों कर रहे हैं। क्या अग्निवीरों को पर्याप्त ट्रेनिंग मिल पा रही है। क्या छह महीने का प्रशिक्षित अग्निवीर सेना में काम करने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम है। पिछले एक साल में कितने 'सामान्य' सैनिकों ने सुसाइड किया है। उक्त अवधि के दौरान कितने 'अग्निवीर' सैनिकों ने सुसाइड किया। सरकार, संसद में श्वेत पत्र लेकर आए कि अग्निवीर सैनिक व रेगुलर सैनिक में भेदभाव क्यों है।

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