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Maharashtra: चुनाव से जरांगे से मिलने के लिए सियासी नेताओं की लगी कतार, समर्थन जुटाने की कर रहे कोशिश

Wed, 16 Oct 2024 07:00 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Maharashtra: मनोज जरांगे ने सितंबर 2022 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। तबसे उन्होंने जालना जिले के अंतरावली सराती गांव में आधा दर्जन अनशन किए हैं, जिससे उनकी लोकप्रियता में काफी बढ़ी है।
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मनोज जरांगे - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नजदीक आ गए हैं। ऐसे में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से मिलने के लिए विभिन्न सियासी दलों के नेताओं की कतार लगी हुई है। ये नेता जरांगे से इसलिए मुलाकात कर रहे हैं, ताकि अपने लिए समर्थन जुटा सकें और टिकट सुनिश्चित कर सकें। जरांगे पिछले साल तक बहुत कम लोगों के बीच ही जाने जाते थे। लेकिन अब विभिन्न राजनीतिक हमलों में उन्होंने अपनी एक खास पहचान बना ली है। 

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जरांगे ने सितंबर 2022 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। तब से उन्होंने जालना जिले के अंतरावली सराती गांव में आधा दर्जन अनशन किए हैं, जिससे उनकी लोकप्रियता में काफी बढ़ी है। विश्लेषकों के मुताबिक, मराठा आरक्षण की मांग एक ऐसा मुद्दा है, जिसने लोकसभा चुनाव में महायुति को नुकसान पहुंचाया था और यह मुद्दा अब भी महत्वपूर्ण मतदाता वर्ग के बीच चर्चा में है। जरांगे ने कहा कि सरकार को मराठा समुदाय की मांगों को पूरा करना चाहिए, नहीं तो विधानसभा चुनाव में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।  

सरकार और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ उनके सख्त बयान के बावजूद विभिन्न दलों के कई नेता हाल ही में उनसे मिलने पहुंचे हैं। कई नेताओं ने उनके आंदोलन का समर्थन भी किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, विभाजन के चलते शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव चुनौती बन रहे हैं। उन्होंने कहा, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतत्व वाले महा विकास अघाड़ी तीन-तीन प्रमुख दलों के गठबंधन हैं। यदि किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में पहले से ही गठबंधन की किसी और पार्टी का उम्मीदवार है, तो वहां टिकट पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे बगावत की संभावना बढ़ जाती है। 
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राजनीतिक पर्यवेक्षक अभय देशपांडे के मुताबिक, जो उम्मीदवार खुद को खतरे में महसूस कर रहे हैं, वे जरांगे जैसे प्रभावशाली नेताओं से मिलकर अपने मतदाताओं से सहानुभूति जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर बगावत की संभवना बढ़ती है तो इसमें वोटों में भी बंटवारा हो सकता है और यह जीत का अंतर कम कर सकता है। 

2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने मराठवाड़ा क्षेत्र में सभी लोकसभा सीटें जीती थीं। लेकिन इस साल के लोकसभा चुनाव में जरांगे के नेतृत्व में मराठा आंदोलन का गढ़ माने जाने वाले मराठवाड़ा में वोटों का विभाजन देखा गया, जिससे भाजपा की ओबीसी नेता पंकजा मुंडे को बीड में हार का सामना करना पड़ा।



हाल ही में, भाजपा किसान मोर्चा के राज्य उपाध्यक्ष रमेश पोकेले ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जरांगे से मुलाकात की। इसके अलावा, महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने भी हाल ही में जरांगे से मुलाकात की। सामंत मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के करीबी माने जाते हैं। अगले दिन, जरांगे ने राज्य सरकार से मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। 

एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने भी मंगलवार को जरांगे से मुलाकात की और मराठों व मुसलमानों के कल्याण के लिए उनके साथ गठबंधन के संकेत दिए। जरांगे ने पत्रकारों से कहा, अगर लोगों की भलाई का सवाल है, तो कुछ भी हो सकता है। सही समय पर जरूरी कार्ड खेले जाएंगे। पिछले महीने महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री अब्दुल सत्तार ने भी जरांगे से मुलाकात की। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण और पार्टी विधायक धीरज देशमुख ने भी अलग-अलग जरांगे से मुलाकात की। 
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