हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक विज्ञापन गुजरात के अखबारों में छपा। भाजपा ने इसके लिए अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की आलोचना की और आरोप लगाया कि केजरीवाल दिल्ली की जनता का पैसा दूसरे राज्यों में चुनाव प्रचार पर खर्च कर रहे हैं। हालांकि, इस मामले में सभी राजनीतिक दल आगे हैं और वे अपनी जरूरत के अनुसार दूसरे राज्यों में अपना प्रचार करते रहे हैं। वहीं, भौतिक सीमाओं से परे गूगल पर विज्ञापन की बात करें तो भाजपा कांग्रेस की तुलना में लगभग 6 गुना ज्यादा खर्च कर रही है।
गूगल ट्रांसपेरेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने फरवरी 2019 से अब तक 17.63 करोड़ रुपये का विज्ञापन गूगल के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर दिया है, जबकि कांग्रेस ने इसी दौरान लगभग तीन करोड़ रुपये का ही विज्ञापन दिया है। यानी भाजपा ने कांग्रेस से लगभग 6 गुना ज्यादा पैसा गूगल पर प्रचार में खर्च किया।
भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र इकाई ने अलग से 1.06 करोड़ रुपये गूगल पर विज्ञापन में खर्च किया है, जबकि महाराष्ट्र में शासन कर रही शिवसेना ने इस दौरान केवल 35 लाख रुपये ही खर्च किया है। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) ने इस दौरान केवल 17.04 लाख रुपये खर्च किया है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के कारण खर्च ज्यादा
हालांकि, सबसे ज्यादा खर्च करने वाली राजनीतिक पार्टी की बात करें तो डीएमके ने इस मामले में सबको चौंकाया है। तमिलनाडु की एक क्षेत्रीय पार्टी होने के बाद भी डीएमके ने इसी दौरान 22.25 करोड़ रुपये खर्च किया है जो किसी भी राजनीतिक दल द्वारा किया गया सबसे ज्यादा खर्च है। उसकी प्रतिद्वंदी पार्टी एआईडीएमके ने इसी दौरान 7.31 करोड़ रुपये खर्च किया है। तमिलनाडु में अप्रैल 2021 में विधानसभा चुनाव हुए हैं जिसके कारण यहां के दलों का प्रचार का खर्च बढ़ गया था।
अगर क्षेत्रवार बात करें तो इस मामले में भी तमिलनाडु के विभिन्न दलों ने गूगल पर सबसे ज्यादा खर्च किया। चुनावी वर्ष होने के कारण तमिलनाडु ने 34.63 करोड़ रुपये खर्च किया तो इसके बाद महाराष्ट्र में 7.76 करोड़, दिल्ली में 6.96 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश ने 5.44 करोड़, बिहार ने 4.51 करोड़ और मध्यप्रदेश ने 2.60 करोड़ रुपये खर्च किया। इसके अलावा ओडिशा ने 4.8 करोड़, राजस्थान ने 1.74 करोड़, तेलंगाना 2.64 करोड़, उत्तर प्रदेश 2.90 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल ने 5.09 करोड़ रुपये खर्च किया।
‘दिल्ली में क्यों हो रहा योगी आदित्यनाथ का प्रचार?’
कांग्रस नेता रितु चौधरी ने कहा कि सच्चाई यह है कि आप हो या भाजपा, दोनों ही प्रचार के बल पर अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं। भाजपा से पूछना चाहिए कि दिल्ली के सड़कों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रचार क्यों किया जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ अपने काम के बल पर नहीं, बल्कि प्रचार के जरिए यूपी विधानसभा चुनाव 2022 जीतने की कोशिश कर रहे हैं।
लेकिन सभी करते हैं प्रचार
सच्चाई यह है कि भाजपा हो या कांग्रेस, या कोई और राजनीतिक दल, सभी दिल्ली के अखबारों में अपना विज्ञापन देते रहते हैं। इससे उन्हें राजनीतिक गलियारों में अपने कामकाज को पहुंचाने में, अपनी साख सुधारने में मदद मिलती है। इस जरिए राष्ट्रीय दलों के छोटे-छोटे राज्यों के छत्रप अपनी पार्टी के आलाकमान की नजर में बेहतर होने की कोशिश भी करते हैं क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों के राजनीतिक मुख्यालय दिल्ली में ही हैं।