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PM मोदी ने गौ रक्षकों को बताया गुंडा, भड़की हिंदू महासभा ने दी चेतावनी

Sun, 07 Aug 2016 02:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty Images
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ऊना में दलितों की पिटाई और राजस्थान की गौशाला में सैकड़ों गायों की मौत के बाद शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टाउनटॉल मीटिंग में 'गाय के नाम पर हो रही सियासत' पर चुप्पी तोड़ी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कथित गौ रक्षकों की हरकतों से मुझे बहुत गुस्सा आता है। ये रात में अपराधी होते हैं और दिन में गौ रक्षक बन जाते हैं। कथित गौ रक्षकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चेतावनी के बाद हिंदू महासभा 'प्रधानसेवक' के खिलाफ खड़ी हो गई है। 
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अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर गौ रक्षा में कुछ घटनाएं हो जाती हैं तो मारपीट करने वालों को जेल भी भेजा जाता है, लेकिन 70-80 फीसदी लोगों को अपराधी कहना गलत हैं। 

शर्मा ने कहा, '2014 के चुनाव में मोदी ने गौ हत्या पर रोक लगाने का वादा किया था, लेकिन गौ हत्या बढ़ गई है। अगर एक भी गौ रक्षक गिरफ्तार हुआ तो हम इसका कड़ा विरोध करेंगे। मोदी संसद में ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। '
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टाउनहॉल मीटिंग में PM मोदी ने गौ रक्षकों को बताया अपराधी

नरेंद्र मोदी
पहली बार टाउनहॉल शैली में शनिवार को जनता से रूबरू हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरक्षा के नाम पर गोरखधंधा करने वालों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पड़ताल की जाए, तो इनमें से 80 प्रतिशत लोग ऐसे निकलेंगे, जो गोरक्षा की दुकान खोलकर बैठ गए हैं। ऐसे लोगों पर मुझे बहुत गुस्सा आता है। राज्य सरकारों से उन्होंने ऐसे लोगों का डोजियर तैयार कर उनके खिलाफ कार्रवाई की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘ऐसे लोग दिन में गोरक्षा का चोला पहनकर घूमते हैं और रात में असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। अधिकतर गायें कत्ल नहीं की जातीं, बल्कि प्लास्टिक खाने से मरती हैं। यदि आप सच्चे गोरक्षक हैं तो प्लास्टिक फेंकना और इसका इस्तेमाल बंद कराने का प्रयास करें।’

जयपुर में बनी हिंगोनिया गौशाला में पिछले दिनों 500 से ज्यादा गायें मर चुकी हैं. जो जिंदा हैं, वो भी बहुत खराब हालत में है। उन्हें ना तो समय पर चारा मिल रहा है. ना ही उनकी कोई देखभाल हो रही है. गाय के नाम पर हो रही सियासत के बाद राजस्थान सरकार सक्रिय हुई है। राज्य के मंत्री शनिवार को गौशाला पहुंचे और गायों की सेवा कर रहे हैं और उनके लिए चारे पानी का इंतजाम किया गया है।

ऊना में दलितों की गौहत्या के आरोप में की थी पिटाई

- फोटो : PTI
कथित गौ रक्षकों ने ऊना शहर में सात दलित युवकों की बर्बरता से पिटाई की थी। गौ रक्षकों का आरोप था कि दलित युवकों ने उस गाय की हत्या की थी, जिसका वे चमड़ा निकाल रहे थे। पीड़ितों का कहना था कि गाय स्वाभाविक तौर मरी थी और वे उसका चमड़ा निकाल रहे थे।

दलित युवकों की पिटाई का यह वीडियो वायरल हो गया इसके बाद पूरे देश में व्यापक विरोध हुआ। इस घटना का विरोध कर रहे कुछ दलित युवकों ने आत्महत्या करने की कोशिश की, जबकि अमरेली में पुलिस पर भीड़ के हमले में एक हेड कांस्टेबल की मौत हो गई।

सरकारी पोर्टल माईगाव के दो साल पूरे होने के मौके पर इंदिरा गांधी स्टेडियम में प्रधानमंत्री ने लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि गौ भक्ति और गोसेवा दोनों अलग-अलग चीजें हैं। गोसेवा के अपने गुजरात के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि गायों के लिए एक बार जब उन्होंने स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया था तो एक गाय की स्वास्थ्य जांच के दौरान उसके पेट से दो बाल्टी पॉलिथिन निकली थी।
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हर बात पर पीएम से जवाब मांगने की आदत हो गई है

नरेंद्र मोदी - फोटो : Amar Ujala - file
मोदी ने पुराने समय के राजा और बादशाह के बीच की लड़ाई की कहानी का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जब बादशाहों से राजाओं की लड़ाई होती थी तो बादशाह अपनी सेना के आगे गायों को रख देते थे। इस वजह से हिंदू राजा हथियार का इस्तेमाल नहीं करते थे और युद्ध में हार जाते थे।

उन्होंने देश के मौजूदा हालात सहित आर्थिक, क़ृषि, सुशासन, विकास और स्वास्थ्य जैसे तमाम मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने दृढ़ विश्वास जताया कि यदि हम 30 वर्षों तक 8 प्रतिशत से ऊपर आर्थिक दर पर टिके रहें तो निश्चित तौर पर विकसित देशों में शुमार हो जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हर बात पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगने की आदत-सी पड़ गई है। राज्य भी गलती करे तो प्रधानमंत्री से जवाब मांगा जाता है। मैं इन सब चीजों से नहीं घबराता हूं। देश की सवा सौ करोड़ की आबादी की सेवा के लिए कभी थकता भी नहीं हूं। जहां तक आलोचना की बात है तो बचपन से आलोचना सुनकर ही बड़ा हुआ हूं। लेकिन मुझे लगता है कि अपनी पूरी शक्ति और समय देश के लिए ही खपा दूं।

पड़ोसी देश पाकिस्तान की करतूतों का परोक्ष रूप से जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी देश की विदेश नीति देशहित की नीति होती है। भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा जरूरी है, इंडिया फर्स्ट का यही मूल मंत्र है। अंबेडकर, पटेल और सावरकर सब विदेश छोड़कर देश सेवा के लिए ही आए। इन दिनों समाज सेवा के साथ ‘मेरा क्या’ की भावना जुड़ गई है, जो गलत है।
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