केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक वैश्विक पहल 'लाइफ : लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट' संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP-27 की थीम होगी। COP- 27 मिस्त्र के शर्म-अल-शेख में आयोजित होगा। पीएम मोदी ने पिछले साल नवंबर में ग्लासगो में आयोजित कॉप 26 के सत्र के दौरान एक शब्द 'लाइफ' का प्रस्ताव दिया था।
मोदी ने पिछले साल नवंबर में ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर 26वें संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन में 'लाइफ' का प्रस्ताव दिया दिया था। इसके बाद उन्होंने 5 जून को 'लाइफ-लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट' शुरू किया।
मंत्रालय ने कहा कि 'लाइफ' एक ऐसी जीवन शैली को जीना है जो हमारे ग्रह के अनुरूप हो और इसे नुकसान न पहुंचाए। ऐसी जीवन शैली जीने वाले लोगों को 'प्रो-प्लैनेट पीपल' कहा जाता है।
जलवायु कार्यों में अपनी उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए भारत 2015 से COP में अपने पवेलियन स्थापित कर रहा है। कई थिंक टैंक, नागरिक समाज संगठन, उद्योग निकाय और निजी क्षेत्र पवेलियन में पवेलियन में साइट इवेंट आयोजित करते हैं। मिस्त्र 6 से 18 नवंबर तक COP-27 की मेजबानी करेगा।
बता दें कि प्रधानमंत्री ने COP-26 के दौरान लाइफ मूवमेंट शुरू करने का विचार व्यक्त किया था। सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा था, जलवायु परिवर्तन पर इस वैश्विक मंथन के बीच मैं भारत की ओर से इस चुनौती से निपटने के लिए पांच अमृत तत्व रखना चाहता हूं, पंचामृत की सौगात देना चाहता हूं।
उन्होंने बताया था, "पहला, भारत 2-3- तक अपनी गैर जीवाश्म उर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा। दूसरा, 2030 तक भारत अपनी 50 फीसदी उर्जा की जरूरत अक्षय उर्जा से पूरी करेगा। तीसरा, भारत, अब से लेकर 2030 तक के कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक बिलियन (अरब) टन की कमी करेगा। चौधा, 2030 तक भारत अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता (इंटेंसिटी) को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा और पांचवां, वर्ष 2070 तक भारत, नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा।"
इससे पहले प्रधानमंत्री ने कहा था, मैं आपके सामने एक वन वर्ड मूवमेंट का प्रस्ताव रखता हूं। जलवायु के संदर्भ में वन वर्ड-वन वर्ल्ड का मूल आधार बन सकता है। उन्होंने कहा, ये एक शब्द है-एल.आई.एफ.ई यानि लाइफस्टाइल फॉर एनवारयरनमेंट।'
प्रधानमंत्री यह भी कहा था कि विश्व की आबादी का 17 प्रतिशत होने के बावजूद भारत केवल पांच प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेवार है। बावजूद इसके भारत ने अपना कर्तव्य पूरा करके दिखाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है।