प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को असम में जारी बाढ़ के प्रकोप पर दुख व्यक्त किया और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से असम के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के कारण बाढ़ आ गई है। केंद्र सरकार असम में स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है और इस चुनौती से निपटने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना और एनडीआरएफ की टीमें मौजूद हैं। वे निकासी अभियान चला रहे हैं और प्रभावित लोगों की सहायता कर रहे हैं। निकासी प्रक्रिया के तहत वायुसेना ने 250 से अधिक उड़ानें भरी हैं।
एनडीआरएफ की कुल 26 टीमें मोर्चे पर
इससे पहले राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने बताया कि असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक करीब 17,500 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा चुका है। एनडीआरएफ के एक प्रवक्ता ने कहा कि इनमें से 900 को गुरुवार को निकाला गया। राज्य के 14 बाढ़ प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ की कुल 26 टीमें काम कर रही हैं।
54.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित
असम में गुरुवार को भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसमें 54.5 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं तथा 12 और लोगों की मौत की खबर है। उन्होंने कहा कि मई के मध्य से बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या अब 101 हो गई है।
नदियां उफान पर
अधिकांश प्रभावित जिलों में ब्रह्मपुत्र और बराक नदियां अपनी सहायक नदियों के साथ उफान पर हैं और राज्य के कुल 36 जिलों में से 32 जिलों में भूमि का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। हालांकि कुछ जगहों पर बाढ़ का पानी कम हुआ है।
मेघालय: बारिश से क्षतिग्रस्त मार्गों की बहाली में लगेगा समय
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने बृहस्पतिवार को कहा कि गारो हिल्स में सड़क संपर्क बहाल करने में अभी समय लगेगा। पिछले सप्ताह इस इलाके में भारी बारिश के चलते काफी नुकसान हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार से 300 करोड़ रुपये की सहायता राशि की मांग की है। संगमा ने कहा कि भूस्खलन से सड़कें तबाह हो गई हैं। रास्तों पर बोल्डर जमा हो गए हैं। जिले के सिजु इलाके में पर्यटकों के लिए तैयार की गई सुविधाएं भी नष्ट हो गई हैं। सिमसांग क्षेत्र में राज्य का सबसे बड़ा झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है।