इस सम्मेलन को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि आसियान-भारत की भागीदारी हाल के वर्षों में एक गहरी, मजबूत और बहुआयामी साझेदारी के रूप में विकसित हुई है। आसियान और भारत साल 2002 में सम्मेलन स्तर के भागीदार बने थे और 2012 में रणनीतिक भागीदार बने थे।
मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में प्रधानमंत्री ने भारत-आसियान के संबंधों का लाभ उठाने पर जोर दिया। उन्होंने महामारी से लड़ाई में आसियान की पहल की सराहना की और कोविड-19 आसियान रिस्पॉन्स फंड में 10 लाख डॉलर की राशि देने का एलान किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि सम्मेलन में चर्चा के दौरान पारस्परिक हितों और चिंताओं के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बात की गई। इनमें दक्षिण चीन सागर और आतंकवाद का मुद्दा भी शामिल रहा। दोनों पक्षों ने क्षेत्र में एक नियम-आधारित आदेश को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने कोविड-19 महामारी को 2020 की निर्णायक चुनौती बताते हुए गुरुवार को कहा कि टीका उपलब्ध होने पर आसियान देशों को अपने लोगों तक इसकी निर्बाध, तेजी से और किफायती स्तर पर पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।
आसियान के डिजिटल शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए ली ने प्रत्येक व्यक्ति तक टीका की पहुंच का आह्वान किया और महामारी के दूरगामी असर को कम करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिंगापुर कोविड-19 टीका को लेकर वैश्विक पहल का समर्थन करता है
बता दें कि एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स (आसियान) के साल में दो बार होने वाले सम्मेलन में इस साल वियतनाम अध्यक्ष है। उम्मीद की जा रही है कि इस सम्मेलन में दक्षिण चीन सागर विवाद, कोरोना वायरस महामारी और कारोबार सहित विभिन्न मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
कोरोना वायरस महामारी के कारण इस सम्मेलन में कंबोडिया का प्रतिनिधित्व वहां के उप प्रधानमंत्री ने किया। प्रधानमंत्री हुन सेन कोरोना वायरस से संक्रमित एक मंत्री के संपर्क में आने की वजह से पृथकवास में हैं। हुन सेन कंबोडिया के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले शख्स हैं।
आसियान (ASEAN या Association of Southeast Asian Nations) दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का एक संगठन है। इसकी स्थापना एशिया-प्रशांत के औपनिवेशिक देशों को बीच बढ़ते तनाव के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने किए की गई थी। आसियान भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
आसियान के सदस्यों में इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, फिलिपीन, वियतनाम, म्यांमा, कंबोडिया, ब्रूनेई और लाओस है। विवादित दक्षिण चीन सागर और पूर्वी लद्दाख में चीन के आक्रामक रवैये के बीच इस शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ है। दक्षिण चीन सागर में आसियान के कई देशों के साथ चीन का विवाद चल रहा है।