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प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा: उनके इस दौरे के हैं कई कूटनीतिक मायने, अफगानिस्तान पर होगी बाइडन से बात

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका में होने वाले कार्यक्रमों के दो पक्ष काफी महत्वपूर्ण हैं। पहला तो यह कि वह राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी हितों को साधेंगे। पेंटागन के रणनीतिकार भी चाहते हैं कि अमेरिका को भारत के साथ रिश्तों की अहमियत को कम नहीं करना चाहिए...
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अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी - फोटो : PTI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बड़ी कूटनीतिक पारी खेलने अमेरिका गए हैं। 22 से 25 सितंबर तक के इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ रणनीतिकारों की एक टीम भी गई है। माना जा रहा है कि कूटनीतिक कामयाबी मिलने के बाद बड़े पैमाने पर भारत की चिंता कई स्तर पर दूर हो सकती हैं। कम से कम क्षेत्रीय सुरक्षा के मामले में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

क्या होगा मुख्य एजेंडा?

वैसे तो प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे का एजेंडा बहुत बड़ा है, लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण अफगानिस्तान ही है। अफगानिस्तान और वहां के हालात को लेकर वह राष्ट्रपति बाइडन से विशेष चर्चा करेंगे। विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने अमेरिका रवाना होने से पहले इसकी पुष्टि की है। प्रधानमंत्री इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान भी उठाएंगे। लेकिन यह मामला सिर्फ मुद्दा उठाने तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री के एजेंडे में पड़ोसी देश पाकिस्तान की अति उत्साह वाली भूमिका की चर्चा भी शामिल है। पाकिस्तान पड़ोसी देश अफगानिस्तान में अपनी मनमानी चला रहा है और उस पर कई तरह के दबाव बना रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका के कुछ कूटनीतिज्ञों, सुरक्षा और खुफिया विशेषज्ञों का ध्यान अफगानिस्तान में अपना हित सुरक्षित रखने के लिए पाकिस्तान से संबंधों की तरफ जा रहा है। पाकिस्तान और चीन संबंधों का नया समीकरण बना रहे हैं। अफगानिस्तान में चीन और तुर्की की भी रुचि बढ़ रही है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री की बाइडन से द्विपक्षीय वार्ता इसी को ध्यान में रखकर होगी। भारत की निगाह अफगानिस्तान में पाकिस्तान की षड़यंत्र से भरी भूमिका पर ही टिकी हुई है।

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शांतिप्रिय, लोकतांत्रिक और खुशहाल अफगानिस्तान चाहता है भारत

भारत ने अफगानिस्तान के ताजा हालात के मद्देनज़र आतंकवाद को ही अपनी मुख्य चिंता में शामिल किया है। नई दिल्ली लगातार जोर दे रहा है कि वह शांतिप्रिय, स्थायी, लोकतांत्रिक, खुशहाल अफगानिस्तान चाहता है। जहां अमन, शांति, विकास और अफगानिस्तान के निर्माण का पूरा स्कोप हो। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी भारत की इस मंशा के बारे में बताया। दुनिया के देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत की मांग है कि किसी भी देश की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद, अलगाववाद, हिंसा फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए। इस तरह की स्थिति वैश्विक समाज के हित में नहीं है। इसलिए विश्व में फैल रही कट्टरता को कम करने के उपाय किए जाने चाहिए।

उप राष्ट्रपति कमला हैरिस से भेंट भी अहम होगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका में होने वाले कार्यक्रमों के दो पक्ष काफी महत्वपूर्ण हैं। पहला तो यह कि वह राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी हितों को साधेंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडन से उनकी पहली सीधी मुलाकात है। पेंटागन के रणनीतिकार भी चाहते हैं कि अमेरिका को भारत के साथ रिश्तों की अहमियत को कम नहीं करना चाहिए। अफगानिस्तान के मामले में भी पाकिस्तान और चीन की रणनीति को जवाब देने के लिए भारत का सहयोग लिया जाना चाहिए। दूसरी बात, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मुलाकात भी बेहद अहम है। समझा जा रहा है कि इसके लिए अमेरिका में भारत के राजदूत, विदेश मंत्री एस जयशंकर, विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने काफी मशक्कत भी की है। इन दोनों समीकरणों पर मिली कामयाबी आगे भी काफी अहम होगी।
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