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PM Modi Russia Visit: पीएम मोदी की यात्रा के बहाने अमेरिका को भारत से इतनी बड़ी उम्मीद क्यों? जानें सब कुछ

सार

दिलचस्प है कि प्रधानमंत्री मोदी रूस के दौरे पर थे और उसी समय अमेरिका में 32 देशों के नाटो संगठन की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी हैं।
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पुतिन से मिलते पीएम मोदी - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रूस की यात्रा में भव्य अभामंडल दिखा। राष्ट्रपति पुतिन ने गजब की गर्मजोशी भरा स्वागत दिखाया। मोदी की यात्रा से ठीक पहले रूस ने कहा भी था कि पश्चिम जल रहा है तो जले। अब प्रधानमंत्री ऑस्ट्रिया में हैं, लेकिन उनकी इस यात्रा पर चीन और अमेरिकी दोनों की निगाह टिकी थी। प्रधानमंत्री की रूस यात्रा पूरी होने के बाद ह्वाइट हाऊस ने नए अंदाज में अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। व्हाइट हाउस ने बयान में कहा कि भारत के रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ अच्छे संबंध हैं। भारत चाहे तो रूस के राष्ट्रपति से यूक्रेन में संघर्ष खत्म करने के लिए कह सकते हैं। भारत को अपने इस संबंध का इस्तेमाल करना चाहिए।

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भारत के बारे में ह्वाइट हाऊस की प्रेस सचिव करिन जीन पियरे के इस बयान को कूटनीति के गलियारे में अजब नजरों से देखा जा रहा है। अमेरिका में रह चुके भारत के पूर्व राजदूत ने अमर उजाला से कहा कि अमेरिका को भारत और रूस के संबंध के बारे में पता है। अमेरिका कों यह भी पता है कि जो वह कह रहे हैं, उसमें भारत कितना असरदार है। विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि एक दिन पहले अमेरिका को प्रधानमंत्री की रूस यात्रा खल रही थी। अब इतनी बड़ी बात कह रहा है। इसका मतलब समझिए। रंजीत कुमार कहते हैं कि अमेरिका और रूस दोनों चीन को दायरे में रखने के लिए भारत को महत्व दे रहे हैं।

अमेरिका में हैं राष्ट्रपति जेलेंस्की,जो बाइडेन से करेंगे मुलाकात और कह रहे हैं लड़ाई में हारेगा रूस
दिलचस्प है कि प्रधानमंत्री मोदी रूस के दौरे पर थे और उसी समय अमेरिका में 32 देशों के नाटो संगठन की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी हैं। उनकी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात प्रस्तावित है। जेलेंस्की कह रहे हैं कि यूक्रेन में जारी सैन्य संघर्ष में रूस हारेगा। राष्ट्रपति जो बाइडेन रूस के खिलाफ यूक्रेन को सैन्य सहायता, हवाई हमले से सुरक्षा के साजो सामान, सहायता और हथियार देने की वकालत कर रहे हैं। जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के एक दूसरे के गले लगने पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। 
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अमेरिका ने भी इस मामले में परोक्ष रूप से भारत को यूक्रेन की संप्रभुता की याद दिलाया था। यह सभी को पता है कि राष्ट्रपति पुतिन की सेना के यूक्रेन में घुसने का एक मात्र कारण यूक्रेन के नाटो संगठन में शामिल होने की मंशा तथा इसके पीछे अमेरिकी कोशिश थी। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी कहा है कि यूक्रेन के साथ सैन्य संघर्ष में अब रूस पिछड़ रहा है। इस युद्ध में उसे 3.5 लाख सैनिकों का नुकसान उठाना पड़ा है। जो बाइडेन ने यूक्रेन को वायु प्रतिरक्षा उपकरण देने की भी घोषणा कर दी है। इस उपकरण को देने का सीधा अर्थ है कि अभी यूक्रेन में सैन्य संघर्ष जारी रहने के पूरे आसार हैं। बाइडेन ने कहा कि उन्हें पता है, रूस के राष्ट्रपति पुतिन रुकने वाले नहीं हैं, लेकिन यूक्रेन उन्हें रोकेगा।

क्या भारत और अमेरिका में सब कुछ ठीक है?
भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार देश हैं। दोनों के बीच में आपसी संबंध काफी मजबूत स्थिति में हैं। ह्वाइट हाऊस की प्रेस सचिव करिन जीन पियरे ने भारत और अमेरिका के संबंधों को विश्वसनीय बताया है। इसकी तारीफ की है। हालांकि कई मामले में भारत और अमेरिका के बीच में संबंध नये अंदाज में चल रहे हैं। अमेरिका अपनी कुछ मजबूरियों के चलते भारत को रूस के करीब जाने से नहीं रोकने का प्रयास नहीं कर रहा है। इसके प्रमुख कारण में चीन को संतुलित रखना भी माना जा रहा है। 

वैसे, जी-20 शिखर सम्मेलन में जो बाइडेन भारत आए थे। भारत ने उन्हें गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। राष्ट्रपति बाइडेन ने इस निमंत्रण को सैंद्धांतिक रूप से स्वीकारते हुए अपनी सहमति दे दी थी लेकिन बाद में व्यस्तता का हवाला देकर आने से इनकार कर दिया। अमेरिका ने भारत द्वारा कनाडा जैसा अपने देश में सीक्रेट आपरेशन चलाने का आरोप लगाया था। माना जा रहा है कि अमेरिका और भारत के रिश्ते काफी ठोस बुनियाद पर हैं, लेकिन राष्ट्रपति बाइडेन प्रशासन और नई दिल्ली के बीच कुछ मामलों में थोड़ी उठा-पटक चल रही है।

रूस के गठजोड़ से अमेरिका चिंतित, चुनाव में भी बड़ा मुद्दा और मोदी की यात्रा निकला बड़ा संदेश
यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई को अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप अपने प्रतिद्वंदी जो बाइडेन की कूटनीतिक, रणनीतिक विफलता मानते हैं। बाइडेन के कार्यकाल में रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों को कड़ा कर दिया गया है। राष्ट्रपति बाइडेन की इस दौरान भरपूर कोशिश रही कि रूस को दुनिया के देशों से अलग-थलग किया जाए। लेकिन नतीजे इसके उलट आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा से भी दुनिया में यही संदेश गया है। तीन महीने बाद अमेरिका में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भी है। 

व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को इसमें आने का निमंत्रण दिया है और मोदी ने आना स्वीकार किया है। ब्रिक्स फोरम के निर्माण में रूस की अहम भूमिका है। यह भारत, चीन और रूस के बीच में पहले से चले आ रहे रिक (आरआईसी) का विस्तार है। ब्रिक्स में शुरू में भारत, चीन, रूस के साथ ब्राजील(ब्रिक) था। अब इसमें दक्षिण अफ्रीका भी शामिल (ब्रिक्स)हो चुका है। इस साल इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी रूस कर रहा है। 1 जनवरी 2024 को इसका सदस्य बनने के लिए मिश्र, इथोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) को आमंत्रित किया गया। इस तरह से संगठन में 10 देश हो गए हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने चार महीने पहले कहा था कि ब्रिक्स में 30 और देश शामिल होना चाहता हैं। वर्तमान में ब्रिक्स में दुनिया की 45 प्रतिशत से अधिक की आबादी वाले देशों तक इसका दायरा है। रूस का यह क्षेत्रीय गठजोड़ अमेरिका के लिए हैरानी बरा संदेश है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी कह दी बड़ी बात
रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी बात कह दी। जब मोदी अपनी बात कह रहे थे तो उनके वाक्य का तनाव पुतिन के चेहरे पर झलक रहा था। प्रधानमंत्री मोदी लगातार कहते आ रहे हैं कि यह समय युद्ध का नहीं है। उन्होंने कहा कि हम युद्ध के मैदान में समस्याओं का समाधान नहीं ढूंढ पाएंगे। चाहे वह कहीं भी हो। भारत ने साफ कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या उसे अस्वीकार्य है। भारत ने साफ कहा कि वह शांति के पक्ष में और यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में अपना योगदान देने के लिए तैयार है।

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