देश में चल रही कोविड-19 की मौजूदा लहर में दवा की किल्लत और कालाबाजारी से जूझ रहे लोगों के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) और भारतीय फार्मा पीएसयू ब्यूरो (बीपीपीआई) सबसे बड़े साथी साबित हुए हैं।
पीएमबीजेके, बीपीपीआई और अन्य हितधारकों ने एकजुट होकर जनता को सस्ते दामों पर आवश्यक दवाएं और अन्य चिकित्सकीय सामान की उपलब्धता बरकरार रखी है। इसकी बदौलत मौजूदा वित्त वर्ष के पहले डेढ़ महीने में ही जनता को 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो चुकी है।
केंद्रीय रसायन व उर्वरक मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि देश भर में इस समय देश के 36 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के हर जिलों को कवर करने वाले 7733 पीएमबीजेके संचालित हैं। इनके जरिए प्रधानमंत्री भारतीय जनशुद्धि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत 1449 दवाएं और 204 सर्जिकल व अन्य वस्तुओं की बिक्री की जा रही है।
बेहतरीन क्वालिटी वाले एन-95 फेसमास्क महज 25 रुपये तो सैनिटाइजर बेहद सस्ते दाम पर बेचे जा रहे हैं। मंत्रालय ने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 में 13 मई तक बीपीपीआई के तहत 80.18 करोड़ रुपये की दवाएं व अन्य चिकित्सकीय सामान बेचे जा चुके हैं, जिनकी बदौलत जनता को लगभग 500 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
पिछले वित्त वर्ष में भी 665.83 करोड़ रुपये की बिक्री की बदौलत जनता को 4000 करोड़ रुपये की बचत कराई गई थी। बता दें कि बीपीपीआई ही पीएमबीजेपी को लागू करने वाली एजेंसी है।
मंत्रालय ने बताया कि जनऔषधि केंद्रों की दवाओं के भंडारण व वितरण के लिए गुरुग्राम, गुवाहाटी और चेन्नई में मौजूद तीन आधुनिक गोदामों के अलावा सूरत में भी एक गोदाम बनाया जा रहा है। इसके अलावा देश भर में 37 वितरक भी तैनात हैं।
कम से कम 50 फीसदी तक दवा पर बचत
मंत्रालय के मुताबिक, पीएमबीजेपी के तहत किसी भी दवा की कीमत बाजार में मौजूद शीर्ष तीन ब्रांडेड दवाओं से कम से कम 50 फीसदी कम होता है। कई दवाएं जनऔषधि केंद्रों पर ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 80 से 90 फीसदी तक सस्ती मिल रही हैं।