गुजरात की मेट्रोपोलिटन अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें मानहानि मामले में मुकदमा चलाने की सरकार की मंजूरी के खिलाफ केजरीवाल ने याचिका दायर की थी। अपनी याचिका में जरिए उन्होंने तर्क दिया था कि पूर्व सरकारी मंजूरी के बिना उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता क्योंकि वह कानून के मुताबिक एक लोक सेवक हैं।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एसजे पांचाल की अदालत ने अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी। मामले की अगली सुनवाई 28 दिसंबर तक टाल दी है। बता दें 13 दिसंबर को 'आप' संयोजक ने अदालत में याचिका दायर की थी। केजरीवाल ने तर्क दिया था कि आवश्यक मंजूरी के बिना उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
दिल्ली के मुख्यमंत्री की याचिका पर आपत्ति जताते हुए गुजरात विश्वविद्यालय का केवकील अमित नायर ने कहा कि मानहानिकारक शब्दों का उच्चारण आधिकारिक कार्य के निर्वहन की श्रेणी में नहीं आता है और इसलिए इस तरह की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। 13 दिसंबर को याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा दायर मानहानि मामले में कार्यवाही स्थगित करने की मांग की गई थी।
बता दें अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह पीएम मोदी की शैक्षणिक डिग्री के संबंध में दिए गए उनके व्यंग्यात्मक और अपमानजनक बयानों पर गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले का सामना कर रहे हैं। गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा पीएम की डिग्री पर मुख्य सूचना आयुक्त के आदेश को रद्द करने के बाद जीयू रजिस्ट्रार पीयूष पटेल ने आप नेताओं के खिलाफ उनकी टिप्पणियों पर मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता ने कहा, उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में और सोशल मीडिया पर मोदी की डिग्री को लेकर विश्वविद्यालय को निशाना बनाते हुए अपमानजनक बयान दिए। उन्होंने कहा कि गुजरात विश्वविद्यालय को निशाना बनाने वाली उनकी टिप्पणियां अपमानजनक थीं।