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हमारी चिंताएं हल हों तो आरसीईपी पर बात संभव: पीयूष गोयल

Wed, 06 Nov 2019 03:27 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • पीयूष गोयल ने कहा मौजूदा प्रस्ताव के साथ भारत चीन के समर्थन वाले आरसीईपी का हिस्सा नहीं बनने जा रहा
  • गोयल ने कहा अगर भारत का रवैया अड़ियल होता तो 2014 में ही हमने समझौते से मना कर दिया होता
  • केंद्रीय मंत्री ने कहा मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते ही भारत के आरसीईपी समूह में शामिल होने पर बातचीत शुरू हुई थी
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रेल मंत्री पीयूष गोयल - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को संकेत दिए कि अगर भारत की चिंताओं का निवारण किया जाता है तो भारत के साथ क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागेदारी (आरसीईपी) पर बात बन सकती है। हालांकि उन्होंने साफ किया किया मौजूदा प्रस्ताव के साथ भारत चीन के समर्थन वाले आरसीईपी का हिस्सा नहीं बनने जा रहा।

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उन्होंने कहा, ऐसे बड़े और राष्ट्रीय हित के फैसले एक झटके में नहीं लिए जाते और इनमें बातचीत की गुंजाइश हमेशा रहती है। उधर चीन भी इस समझौते को लेकर भारत से बातचीत करना चाहता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, पीएम मोदी ने मजबूती के साथ अपना पक्ष रखते हुए तब तक इस समझौते में नहीं शामिल होने का एलान किया है जब तक चीन के साथ उसके व्यापारिक घाटे और अधिक संभावनाओं वाले बाजारों में पर्याप्त अधिकार मिलने संबंधी शर्तों पर सदस्य देशों में सहमति नहीं बन जाती। गोयल ने कहा, बातचीत की गुंजाइश अभी भी है।

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हमारी कोई दुश्मनी नहीं हुई है जो बातचीत नहीं कर सकते

हमारी कोई दुश्मनी नहीं हुई है जो बातचीत नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि अगर सभी चिंताओं का हल किया जाए तो सभी सरकारें बातचीत को तैयार है। अड़ियल रवैये के सवाल पर गोयल ने कहा, अगर भारत का रवैया अड़ियल होता तो 2014 में ही हमने समझौते से मना कर दिया होता।

2019 तक इस पर बात हो रही है इससे साफ है कि हम अपने हितों की पूर्ति की शर्त पर कायम हैं। जैसे ही यह पूरी होती है हम आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, लेकिन में साफ करना चाहता हूं कि फिलहाल के लिए इस प्रस्ताव पर भारत की सख्त न है।

एफटीए ठीक पर अभी इस पर कोई चर्चा नहीं

गोयल ने कहा कि यूरोपीय यूनियन के कई देश एफटीए को लेकर मई 2013 में रोकी गई बातचीत शुरू करना चाहते हैं लेकिन अभी इसको लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही। गोयल ने कहा, एफटीए ठीक है, इसके तहत हम यूरोपीय यूनियन से कई उत्पादों का निर्यात कर सकते हैं। वहीं गोयल ने आरसीईपी पर विपक्ष की आलोचनाओं पर हमला बोलते हुए कहा कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते ही भारत के आरसीईपी समूह में शामिल होने पर बातचीत शुरू हुई थी। कांग्रेस ने तब इस बात की अनदेखी की थी कि तत्कालीन प्रस्ताव से देश को व्यापार में भारी घाटा हो रहा था।
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