हमारी कोई दुश्मनी नहीं हुई है जो बातचीत नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि अगर सभी चिंताओं का हल किया जाए तो सभी सरकारें बातचीत को तैयार है। अड़ियल रवैये के सवाल पर गोयल ने कहा, अगर भारत का रवैया अड़ियल होता तो 2014 में ही हमने समझौते से मना कर दिया होता।
2019 तक इस पर बात हो रही है इससे साफ है कि हम अपने हितों की पूर्ति की शर्त पर कायम हैं। जैसे ही यह पूरी होती है हम आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, लेकिन में साफ करना चाहता हूं कि फिलहाल के लिए इस प्रस्ताव पर भारत की सख्त न है।
एफटीए ठीक पर अभी इस पर कोई चर्चा नहीं
गोयल ने कहा कि यूरोपीय यूनियन के कई देश एफटीए को लेकर मई 2013 में रोकी गई बातचीत शुरू करना चाहते हैं लेकिन अभी इसको लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही। गोयल ने कहा, एफटीए ठीक है, इसके तहत हम यूरोपीय यूनियन से कई उत्पादों का निर्यात कर सकते हैं। वहीं गोयल ने आरसीईपी पर विपक्ष की आलोचनाओं पर हमला बोलते हुए कहा कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते ही भारत के आरसीईपी समूह में शामिल होने पर बातचीत शुरू हुई थी। कांग्रेस ने तब इस बात की अनदेखी की थी कि तत्कालीन प्रस्ताव से देश को व्यापार में भारी घाटा हो रहा था।