केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सहयोगी रामदास अठावले ने कहा है कि राजकोट किले में शिवाजी महाराज की मूर्ति का निर्माण काम एक अनुभवहीन मूर्तिकार को सौंपना एक गलती थी। मालवन तालुका में किले का दौरा करने के बाद उन्होंने सामाजिक न्याय राज्य मंत्री से मामले में विस्तृत जांच की मांग की है।
मीडिया से बात करते हुए अठावले ने कहा, "अनुभवी मूर्तिकारों की कोई कमी नहीं है; एक नौसिखिए को जिम्मेदारी क्यों दी गई?" उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग और नौसेना के संबंधित अधिकारियों की भी जांच की जानी चाहिए।
आरपीआई (ए) प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा माफी मांगे जाने के बाद विपक्ष को इस घटना का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।
चुनाव से पहले मूर्ति गिरने से सियासत गरमाई
इस साल के अंत में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव होने हैं। इससे पहले शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने को लेकर राज्य में सियासत तेज है। इस मूर्ति का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। मूर्ति गिरने के बाद विपक्षी दल महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। विरोधियों के आरोप के बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने राज्य की जनता से माफी मांगी। बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य की जनता से माफी मांगी, जिसके बाद मामला और गरमा गया है।
महाराष्ट्र का मूर्ति प्रकरण क्या है?
दरअसल, इसी 26 अगस्त को सिंधुदुर्ग के राजकोट किले में स्थापित की गई छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिर गई। सिंधुदुर्ग जिले में 4 दिसंबर, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौसेना दिवस पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया था। 35 फुट की इस प्रतिमा का अनावरण नौसेना दिवस समारोह के हिस्से के रूप में किया गया था।
इस आयोजन का उद्देश्य समुद्री रक्षा और सुरक्षा के प्रति मराठा नौसेना और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत एवं आधुनिक भारतीय नौसेना के साथ इसके ऐतिहासिक संबंधों का सम्मान करना था। इसके लिए राज्य सरकार ने धन भी मुहैया कराया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतिमा पर महाराष्ट्र सरकार ने 2.36 करोड़ रुपये खर्च किए थे।