पूर्व राजनयिक सुजान चिनॉय ने तेजी से हो रहे चीन के विकास पर चिंता जाहिर की है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत-चीन के बीच चल रहे अनसुलझे सीमा विवादों और भारत के विकास को लेकर उसकी शत्रुतापूर्ण नीति के कारण यह हमारे के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। वे 'ग्लोबल ट्यूमल्ट: इंडिया एज़ ए पोल स्टार' नामक अपनी पुस्तक का विमोचन करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। चिनॉय ने कहा कि अगर भारत एक प्रमुख शक्ति बनना चाहता है तो उसे अपनी परिधि पर शांति और स्थिरता की आवश्यकता है।
चिनॉय ने कहा कि चीन का विकास भारत के लिए दो मायनों में बड़ी चिंता का विषय है। पहला, चीन भारत का प्रत्यक्ष पड़ोसी है जिसकी अनसुलझी सीमा हजारों किलोमीटर तक फैली हुई है। दूसरा यह कि चीन का उदय भारत के विकास के लिए प्रतिकूल है।
मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के महानिदेशक चिनॉय ने कहा कि आज बड़ी दुविधा यह है कि चीन के साथ संबंधों को कैसे प्रबंधित किया जाए। उन्होंने कहा कि चीन गलवान घाटी में झड़प के चार साल बाद संबंधों को सामान्य बनाना चाहता है, लेकिन भारत का रुख अलग है। भारत का साफ कहना है कि दोनों देश तब तक सामान्य संबंध का दिखावा नहीं कर सकते, जब तक कि चीन सीमा पर टकराव वाले शेष प्वाइंट्स पर सैनिकों को पीछे नहीं हटाता और शांति और स्थिरता की गारंटी नहीं देता।