सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करके देशभर के हाईकोर्ट को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे मामलों का पंजीकरण करने और समान न्यायिक शब्दावली, वाक्यांशों एवं संक्षिप्त शब्दों का उपयोग करने के लिए समान संहिता अपनाने की दिशा में उचित कदम उठाएं। वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी याचिका में विधि आयोग को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि वह न्यायिक शब्दावली, वाक्यांशों, संक्षिप्त शब्दों, केस दर्ज करने की प्रक्रिया और अदालत के शुल्क में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्टों के साथ विचार-विमर्श करके एक रिपोर्ट तैयार करे।
याचिका में कहा गया है, विभिन्न मामलों में अलग-अलग हाईकोर्ट जो शब्दावली इस्तेमाल करते हैं, उसमें एकरूपता नहीं है। इससे न केवल आम लोगों को, बल्कि कई मामलों में वकीलों एवं प्राधिकारियों को भी असुविधा होती है। इसमें कहा गया है कि एक ही प्रकार के मामलों में उपयोग की जाने वाली शब्दावली ही अलग नहीं है, बल्कि इन शब्दावलियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संक्षिप्त शब्द भी अलग-अलग हैं। याचिका में कहा गया है कि देशभर के 25 हाईकोर्टों में अलग-अलग केसों के लिए शब्दावलियां भी अलग-अलग हैं।