उन्होंने कहा, 'निजी तौर पर हम कुछ भी नहीं खोते (अगर सत्ता में नहीं आते हैं)। अगर आप हमें हरा देते हैं तो हम आराम करेंगे। हम कुछ भी खोते या हासिल नहीं करते हैं। लेकिन आप (लोग) हार जाएंगे। यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं आपको बताऊं कि तेलंगाना के सेनानियों और उपलब्धियों के रूप में और तेलंगाना का सही तरीके से मार्गदर्शन करने के लिए, आपको बताना हमारा कर्तव्य है।'
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी तेलंगाना की भलाई के बजाय उस पर शासन करना चाहती है। राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वादा किया था कि वह कर्नाटक में किसानों को 20 घंटे बिजली देगी, लेकिन वह पांच घंटे भी बिजली नहीं दे पाई। उन्होंने कहा कि यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य गुजरात भी किसानों को 24 घंटे बिजली नहीं देता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी ने 50 साल से अधिक समय तक शासन किया लेकिन उसने दलित बंधु जैसी योजनाओं को लागू करने के बारे में कभी नहीं सोचा। उन्होंने दलितों को वोट बैंक की तरह माना। उन्होंने हमारे लिए कभी काम नहीं किया।' केसीआर ने कहा कि अगर ऐसी योजनाएं होतीं तो दलित आज 'राजाओं' की तरह होते।
पिछले 10 वर्षों में तेलंगाना की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए केसीआर ने कहा कि दक्षिणी राज्य को इस तरह से विकसित किया गया है कि यह एक दशक में देश में एक रोल मॉडल बन गया है। यह देश का एकमात्र राज्य है जो घर के दरवाजे पर पीने का पानी प्रदान करता है। सत्तारूढ़ बीआरएस के घोषणापत्र के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी फिर से सत्ता में आती है तो वह धीरे-धीरे सामाजिक पेंशन और रायथू बंधु योजना के तहत सहायता बढ़ाएगी, जिसका उद्देश्य किसानों का कल्याण करना है।
राव ने दशहरा की छुट्टी के बाद 30 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपना प्रचार अभियान गुरुवार से फिर से शुरू किया। यह अभियान नौ नवंबर तक चलेगा, जब वह गजवेल और कामारेड्डी निर्वाचन क्षेत्रों से अपना नामांकन दाखिल करेंगे। सत्तारूढ़ बीआरएस का लक्ष्य इस बार चुनावी जीत की हैट्रिक हासिल करना है।