कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर तीन दिन में दूसरी बार फिर से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक हुई। इस बीच एक बड़ी खबर यह आई कि इस बैठक के बीच पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर पहुंचीं है। दोनों के बीच हुई इस अहम मुलाकात के बाद अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि मुफ्ती एक बार फिर से यूपीए का हिस्सा बन सकती हैं।
शनिवार को भी हुई थी बैठक
इससे पहले शनिवार को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित कांग्रेस पार्टी की बैठक करीब 4 घंटे तक चली थी। बैठक में प्रशांत किशोर ने अपने प्रजेंटेशन में कहा था कि कांग्रेस पार्टी को 370 सीटों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस को यूपी, बिहार और ओडिशा में अकेले लड़ने की सलाह दी थी। साथ ही पीके ने कहा था कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में कांग्रेस को गठबंधन में लड़ना चाहिए। प्रशांत किशोर की बातों पर राहुल गांधी ने भी सहमित जताई थी। सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर आने वाले दिनों में कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी में कोई खास पद नहीं मांगा है।इससे पहले एक इंटरव्यू में खुद प्रशांत ने मई में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा एलान करने की बात कही थी।
पीडीपी का सफरनामा
कांग्रेस के पूर्व नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 1999 में बेटी महबूबा मुफ्ती के साथ पीडीपी का गठन किया था। पार्टी गठन के महज 3 साल बाद पीडीपी सत्ता में आई। मुप्ती मोहम्मद सईद राज्य के सीएम बने। महज 16 सीटें जीतने वाली सईद की पार्टी को उनकी पुरानी पार्टी कांग्रेस का समर्थन मिला। दोनों पार्टियों में समझौते के तहत पहले चीन साल सईद और बाद में 3 साल कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद सीएम रहे। 2008 में पीडीपी ने कांग्रेस से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस का समझौता हुआ। अगर महबूबा मुफ्ती कांग्रेस के साथ आती हैं तो करीब 14 साल बाद दोनों पार्टियां एक साथ होंगी।
इस बीच, सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के तीन दिवसीय 'चिंतन शिविर' राजस्थान के जयपुर में 14 मई, 15 और 16 मई को आयोजित होने की संभावना है। देश भर से लगभग 400 कांग्रेस नेताओं के 'चिंतन शिविर' में इकट्ठा होने की उम्मीद है, जिसमें कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के पदाधिकारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री, राज्य अध्यक्ष और विधायक दल के नेता शामिल हैं।
देश भर के कांग्रेस के शीर्ष नेता हाल ही में संपन्न चुनावों में पार्टी की हार के कारणों पर चर्चा करेंगे और साथ ही आगामी रणनीतियों पर मंथन करेंगे। यह 'शिविर' कांग्रेस के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ महीनों में कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।