अन्नाद्रमुक के शीर्ष नेता ओ पनीरसेल्वम ने सोमवार को कहा कि पार्टी नेतृत्व चर्चा करेगा और दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की विश्वासपात्र रहीं वी के शशिकला को फिर से पार्टी में शामिल किया जाए या नहीं। शशिकला खुद को अन्नाद्रमुक महासचिव घोषित कर रही हैं और पार्टी पर फिर से नियंत्रण पाने के लिए कई कदम उठा रही हैं। ओपीएस की टिप्पणी विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो जाती है, जब उनके सहयोगी और पार्टी के समन्वयक के पलानीस्वामी ने कुछ दिनों पहले उनकी वापसी की संभावना से इनकार किया था।
शशिकला के राजनीतिक कदमों के बारे में पूछे जाने पर पनीरसेल्वम ने संवाददाताओं से कहा कि राजनीति में कोई भी शामिल हो सकता है, लेकिन उन्हें स्वीकार करना या न करना लोगों के हाथ में है। यह पूछे जाने पर कि क्या अन्नाद्रमुक उन्हें वापस पार्टी में स्वीकार करेगी, उन्होंने कहा कि इस पर चर्चा की जाएगी।
पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी करेंगे फैसला
ओपीएस भी पार्टी समन्वयक हैं और उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक पार्टी के संस्थापक एमजी रामचंद्रन के दिनों से एक कैडर आधारित पार्टी है। पार्टी अब एक संगठनात्मक ढांचे के आधार पर चलाई जा रही है जिसमें समन्वयक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक शशिकला को फिर से पार्टी में शामिल करने का संबंध है, अन्नाद्रमुक के आला अधिकारी और शीर्ष स्तर के पदाधिकारी इस मामले पर विचार-विमर्श करेंगे और निर्णय लेंगे।
जयकुमार का पनीरसेल्वम पर निशाना
वहीं, अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता डी जयकुमार ने चेन्नई में संवाददाताओं से कहा कि पनीरसेल्वम ने ही 2017 में शशिकला और उनके परिवार के खिलाफ धर्म युद्ध शुरू किया था। उन्होंने कहा कि पनीसेल्वम ने अपने और पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले शिविरों के एकीकरण के लिए शशिकला से संबंध तोड़ने की शर्त रखी थी।