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Expunction: राहुल गांधी के संसद में दिए भाषण के कुछ हिस्से हटे, इसका मतलब क्या और ऐसा कब होता है? समझें नियम

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 02 Jul 2024 06:05 PM IST

सार

Parts of Rahul Gandhi Speech Expunged: लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी के प्रथम भाषण के कई अंश संसद के रिकार्ड से हटा दिए गए हैं। संसद में दिए गए भाषण के किन हिस्सों को हटाया जाना है, यह निर्धारित करने की जिम्मेदारी सदन के पीठासीन अधिकारी की होती है।
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राहुल गांधी का भाषण - फोटो : amar ujala
इस समय नई लोकसभा का पहला सत्र चल रहा है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे हैं। इससे पहले संसद में सोमवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जवाब दिया। इस दौरान कांग्रेस नेता ने हिंदुओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने हिंदू धर्म और संस्कृति को लेकर ऐसी टिप्पणियां की जिसपर भाजपा ने तीखा विरोध जताया। बाद में राहुल गांधी द्वारा दिए गए संबोधन में से कई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा दिया गया।

हालांकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब सांसदों द्वारा दिए गए भाषणों के कुछ भागों को हटाया गया है। रिकार्ड से कुछ शब्दों, वाक्यों या भाषण के कुछ अंशों को हटाना (एक्सपंक्शन) एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता रहा है। अब राहुल गांधी ने अपनी कुछ टिप्पणियां हटाए जाने पर एक बार फिर सरकार को घेरा है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि हकीकत में सच्चाई को मिटाया नहीं जा सकता है। 


आइये जानते हैं कि संसद में हुआ क्या था? भाषण के अंश कब हटाए जाते हैं? भाषण के अंश हटाने की प्रक्रिया क्या है? रिकार्ड से हटाने के नियम क्या हैं? राहुल गांधी ने अपना भाषण काटने पर क्या कहा है?
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राहुल गांधी का भाषण - फोटो : amar ujala
इस समय नई लोकसभा का पहला सत्र चल रहा है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे हैं। इससे पहले संसद में सोमवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जवाब दिया। इस दौरान कांग्रेस नेता ने हिंदुओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने हिंदू धर्म और संस्कृति को लेकर ऐसी टिप्पणियां की जिसपर भाजपा ने तीखा विरोध जताया। बाद में राहुल गांधी द्वारा दिए गए संबोधन में से कई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा दिया गया।

हालांकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब सांसदों द्वारा दिए गए भाषणों के कुछ भागों को हटाया गया है। रिकार्ड से कुछ शब्दों, वाक्यों या भाषण के कुछ अंशों को हटाना (एक्सपंक्शन) एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता रहा है। अब राहुल गांधी ने अपनी कुछ टिप्पणियां हटाए जाने पर एक बार फिर सरकार को घेरा है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि हकीकत में सच्चाई को मिटाया नहीं जा सकता है। 

आइये जानते हैं कि संसद में हुआ क्या था? भाषण के अंश कब हटाए जाते हैं? भाषण के अंश हटाने की प्रक्रिया क्या है? रिकार्ड से हटाने के नियम क्या हैं? राहुल गांधी ने अपना भाषण काटने पर क्या कहा है?

राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई
पहले जानते हैं कि संसद में हुआ क्या था?
सोमवार को राहुल गांधी ने बतौर नेता विपक्ष अपना पहला भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने हिंदुओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-बीजेपी-आरएसएस पर टिप्पणियां की थी। राहुल गांधी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए हिंदू धर्म पर टिप्पणी की थी। राहुल की इस बात पर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताई थी। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गांधी के संबोधन से जिन टिप्पणियों को संसदीय कार्यवाही से हटाया गया है, उनमें राहुल गांधी के भाजपा पर लगाए गए आरोप, अदाणी और अंबानी पर टिप्पणी और नीट परीक्षा को लेकर लगाए गए आरोप शामिल हैं। साथ ही राहुल गांधी ने अग्निवीर योजना पर एक टिप्पणी को भी कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया है।
 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी - फोटो : pti
आखिर 'एक्सपंक्शन' क्या होता है?
'एक्सपंक्शन' का अर्थ संसद के आधिकारिक अभिलेखों से अनुचित शब्दों को हटाने या काटने से है। संसद में कही गई टिप्पणियों या शब्दों को हटाने के कारण अक्सर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव होता है। भाषण के किन हिस्सों को हटाया जाना है, यह निर्धारित करने की जिम्मेदारी सदन के पीठासीन अधिकारी की होती है। 

राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला
भाषण के अंश हटाने की प्रक्रिया क्या है?
दरअसल, असंसदीय शब्दों को हटाने की प्रक्रिया में रिपोर्टिंग सेक्शन का प्रमुख उन्हें पीठासीन अधिकारी या लोकसभा अध्यक्ष के ध्यान में लाता है और प्रासंगिक कारण बताता है। नियम 380 के तहत, अध्यक्ष यह निर्धारित करते हैं कि क्या शब्द असंसदीय हैं और अपने निर्णय को रिपोर्टिंग सेक्शन को बताते हैं। फिर शब्दों को रिकॉर्ड से हटा दिया जाता है और कार्यवाही में इसे 'अध्यक्ष के आदेशानुसार हटाया गया' नोट के साथ दर्शाया जाता है।

हटाए गए शब्दों की सूची बाद में स्पीकर के कार्यालय, संसद टीवी और संपादकीय सेवा के साथ साझा की जाती है।  इसके साथ ही आधिकारिक रिकॉर्ड से उनके छूट जाने के लिए स्पष्टीकरण भी दिया जाता है। 

लोकसभा में राहुल गांधी - फोटो : संसद टीवी
रिकार्ड से हटाने के नियम क्या हैं?
संविधान के अनुच्छेद 105(2) कहता है कि संसद या उसकी किसी समिति में कही गई किसी भी बात के लिए संसद के किसी भी सदस्य पर किसी भी अदालत में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। हालांकि, सांसदों को सदन के अंदर कुछ भी कहने की आजादी नहीं है।

लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों में रिकार्ड से हटाने का जिक्र मिलता है। नियम 380 कहता है, ‘यदि अध्यक्ष की राय है कि वाद-विवाद में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जो अपमानजनक या अशिष्ट या असंसदीय या अशोभनीय हैं, तो अध्यक्ष अपने विवेक का प्रयोग करते हुए आदेश दे सकते हैं कि ऐसे शब्दों को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाए।’

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला - फोटो : संसद टीवी
शब्द को हटाने के बाद क्या होता है?
कार्यवाही के हटाए गए अंश संसद के अभिलेखों से गायब हो जाते हैं। मीडिया द्वारा उन पर रिपोर्ट नहीं की जा सकती, भले ही कार्यवाही के लाइव प्रसारण के दौरान उन्हें सुना गया हो।

राहुल गांधी ने अपना भाषण काटने पर क्या कहा है? 
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला और दावा किया कि उन्होंने लोकसभा में जो कहा, वह सच है। संसद के बाहर संवाददाताओं से उन्होंने कहा, 'मोदी जी की दुनिया में सत्य को मिटाया जा सकता है। लेकिन वास्तव में सत्य को मिटाया नहीं जा सकता। मुझे जो कहना था, मैंने कह दिया, वही सत्य है। वे जितना चाहें मिटा सकते हैं। सत्य तो सत्य है।'
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