एक प्रमुख विपक्षी दल के सूत्र के मुताबिक, किसी राज्य में सबसे मजबूत पार्टी तय करने का फॉर्मूला पिछले चुनावों के परिणामों को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा। सूत्र ने कहा कि पार्टियां अपनी बातचीत में राज्य स्तर पर फॉर्मूले को अंतिम रूप देंगी, लेकिन यह पिछले लोकसभा चुनावों या पिछले विधानसभा चुनावों या दोनों के परिणामों पर आधारित होगा, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित पार्टियां क्या फैसला लेती हैं।
सूत्र ने कहा कि जिन राज्यों में साझेदारों के बीच पिछला कोई गठबंधन नहीं हुआ है, या ऐसे मामलों में जहां बातचीत अटक सकती है, गठबंधन में शामिल किसी पार्टी का ऐसा प्रतिनिधि जिसका राज्य में हित नहीं हैं, बातचीत में एक पुल के रूप में कार्य करेगा।
हालांकि गठबंधन लोकसभा चुनावों पर केंद्रित है। पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। कुछ नेताओं ने सुझाव दिया है कि एक समझ भी होनी चाहिए ताकि गठबंधन राज्य चुनावों में भी भागीदारों की संभावनाओं को बढ़ा सके।
एक अन्य सूत्र ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, बिहार और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सीटों के बंटवारे पर बातचीत पहले से ही चल रही है, जहां राज्य में इंडिया गठबंधन के सहयोगी भी गठबंधन में हैं। बुधवार को हुई बैठक में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने सुझाव दिया था कि जिन सीटों पर विपक्ष का सांसद है, उन्हें परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
इंडिया गठबंधन की समन्वय समिति की बुधवार को हुई पहली बैठक में यह फैसला किया गया कि सीटों का बंटवारा जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। गठबंधन ने यह भी घोषणा की कि वे अक्तूबर के पहले सप्ताह में मध्य प्रदेश के भोपाल में अपनी पहली संयुक्त जनसभा आयोजित करेंगे। समिति ने जाति जनगणना के मुद्दे को एक साथ उठाने का फैसला किया।