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Supreme Court: शीर्ष अदालत ने रद्द किया सिक्किम हाईकोर्ट का आदेश, दादा की हत्या के आरोपी को किया बरी

Thu, 14 Sep 2023 10:17 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: अपने दादा की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले एक व्यक्ति को उच्चतम न्यायालय ने बरी कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि घटना के समय वह पागलपन से पीड़ित था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपने दादा की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले एक व्यक्ति को उच्चतम न्यायालय ने बरी कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसकी 'अजीब और असामान्य हरकत' इस बात का स्पष्ट संकेत है कि घटना के समय वह पागलपन से पीड़ित था।

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शीर्ष अदालत ने व्यक्ति को दोषी ठहराने और उम्रकैद की सजा सुनाने के सिक्किम उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द किया और निचली अदालत के उस आदेश की पुष्टि की जिसमें उसे बरी कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत ने इस मामले पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 84 के दायरे में विचार किया था, जो अस्वस्थ दिमाग वाले व्यक्ति के कृत्यों से संबंधित है।

आरोपी को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जिसने पिछले साल आदेश को पलटते हुए उसे हत्या का दोषी ठहराया था। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ व्यक्ति की अपील पर सुनवाई कर रही थी।

पागलपन के मुद्दे को अपीलकर्ता ने निचली अदालत के समक्ष उठाया था। पीठ ने कहा कि चिकित्सा साक्ष्य के अलावा, हमले के समय और उसके तुरंत बाद उसका असामान्य/पागल व्यवहार ध्यान देने योग्य था। पीठ ने बुधवार को दिए अपने फैसले में कहा, 'यह भी देखा जाना चाहिए कि अपीलकर्ता-आरोपी ने मृतक (81 वर्षीय) पर एक तेज धार वाले हथियार से हमला किया, जिसे बाद में अभियोजन पक्ष के गवाह-1 (मृतक की बेटी) द्वारा छीन लिया गया था, वह मृतक के गले से श्वास नली निकालने की कोशिश कर रहा था, जो पहले से ही कटी हुई थी।'
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शीर्ष अदालत ने कहा, अपीलकर्ता-आरोपी की यह कार्रवाई अजीब और असामान्य थी। यह स्पष्ट रूप से इस तथ्य का संकेत है कि वह घटना के समय पागलपन से पीड़ित था। पीठ ने अभियोजन पक्ष के दो गवाहों के साक्ष्य और पेश किए गए चिकित्सकीय साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि यह पूरी तरह साबित हो गया है कि अपीलकर्ता ने मृतक पर धारदार हथियार से हमला किया था जिससे उसकी मौत हो गई।
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