भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर।
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संसद की एक समिति ने बुधवार को विदेश मंत्रालय के बजटीय आवंटन पर असंतोष जताते हुए कहा है कि वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद एवं प्रभाव को देखते हुए इसमें वृद्धि की जाए और इसे भारत सरकार के कुल बजट के कम से कम एक प्रतिशत के स्तर पर लाया जाए।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को अपना स्थायी मिशन 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र के शेष 48 देशों में भी समयबद्ध ढंग से स्थापित करना चाहिए जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की आकांक्षा के अनुरूप हो। लोकसभा में पेश विदेश मामलों संबंधी स्थायी समिति की वर्ष 2022-23 के अनुदान की मांगों संबंधी रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने पाया है कि भारत सरकार के कुल बजट आवंटन में वृद्धि के बावजूद विदेश मंत्रालय के लिये बजटीय आवंटन में पिछले चार वर्षों में गिरावट का चलन देखा गया है और वर्ष 2022-23 में यह भारत सरकार के कुल बजट का केवल 0.44 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति मंत्रालय के बजटीय आवंटन को देश की बढ़ती आकांक्षाओं एवं वैश्विक कदम के अनुरूप नहीं पाती है। समिति इस बात से हैरान है कि विदेश मंत्रालय को बजटीय अनुमान के स्तर पर आवंटन कम रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मंत्रालय ने समिति को सूचित किया कि उसने 11 देशों की पहचान की है जहां पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद स्थायी मिशन स्थापित किए जा सकते हैं।