विपक्षी सांसदों ने 13 दिसंबर को संसद में सुरक्षा चूक से पैदा गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए दिन के निर्धारित कार्य को स्थगित करने की मांग की। लेकिन सभापति ने नोटिस को नोटिस को मंजूरी नहीं दी और शून्यकाल को जारी रखा। इस पर पूरा विपक्ष विरोध में भड़क उठा और नारेबाजी करने लगा। चड्ढा ने इस बीच हाथ से इशारा करते हुए (सुरक्षा) व्यवस्था का सवाल उठाने की कोशिश की।
राज्यसभा के सभापति ने क्या कहा?
सभापति ने इस इशारे पर आपत्ति जताई और कहा, 'मिस्टर चड्ढा, आपको व्यवस्था का सवाल उठाने के लिए ऐसा (हाथ का इशारा) करने की जरूरत नहीं है। अपनी जुबान का इस्तेमाल करें। ऐसा मत करो।" आप सांसद को फटकार लगाते हुए धनखड़ ने आगे कहा, 'अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो अपने मुंह का इस्तेमाल करें। अपने हाथों से इशारा न करें। अब आपके लिए बहुत सी चीजें सीखने का समय है। ऐसा लगता है कि आप भी जल्द ही डांस करना शुरू कर देंगे। चुपचाप अपनी सीट पर बैठ जाइए। आपको इस सदन द्वारा पहले ही दंडित किया जा चुका है।'
मॉनसून सत्र के दौरान निलंबित हुए थे राघव चड्ढा
चड्ढा को इस साल अगस्त में संसद के मॉनसून सत्र के दौरान मीडिया में भ्रामक तथ्य पेश करने के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया था। सदन ने चार दिसंबर को एक प्रस्ताव के जरिए उनका निलंबन समाप्त कर दिया और उन्हें कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दे दी गई।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बयान की मांग
इस बीच, विपक्षी सांसदों ने मांग पर अड़े रहे कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बयान देना चाहिए और उसके बाद सुरक्षा उल्लंघन पर चर्चा करनी चाहिए। संसदीय कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। राज्यसभा के सभापति ने विपक्ष के हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। उन्होंने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, सदन के नेता पीयूष गोयल और सदन के अन्य नेताओं से उनके कक्ष में मिलने के लिए भी कहा।
विपक्षी सदस्यों ने फिर शुरू किया हंगामा
सुबह के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। विपक्षी सदस्यों ने बुधवार की सुरक्षा चूक पर चर्चा की मांग करते हुए फिर से हंगामा शुरू कर दिया। धनखड़ ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। सदन की बैठक अब 18 दिसंबर को फिर से शुरू होगी।