अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों को समन
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अधीनस्थ विधान पर राज्यसभा समिति ने अगले सप्ताह अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के सचिव और प्रतिनिधियों को बुलाने का फैसला ऐसे समय में किया है जब संसद की एक संयुक्त समिति वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच कर रही है, जो वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2013 में संशोधन करने का प्रयास करता है। बता दें कि राज्यसभा समिति ने उसी दिन छावनी अधिनियम, 2006 के तहत अधीनस्थ कानून बनाने की प्रक्रिया पूरी करने में देरी के कारणों पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को भी तलब किया है।
नियम समय बनाए जाने की जांच करती है समिति
संसद के दोनों सदनों में अधीनस्थ विधानों पर अपनी-अपनी समितियां हैं, जो इस बात की जांच करती हैं कि किसी कानून से संबंधित नियम और उप-नियम समय पर बनाए गए हैं या नहीं और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप हैं या नहीं। 2013 के अधिनियम ने वक्फ बोर्डों को कुछ शक्तियां दी थीं।
जानकारी के मुताबिक 2024 का विधेयक, जो एक संयुक्त पैनल के समक्ष है, एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार करना चाहता है। यह विधेयक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की पहली बड़ी पहल है, जिसका उद्देश्य एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार करना है।
इसमें कई सुधारों का प्रस्ताव है, जिसमें मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व देने के साथ राज्य वक्फ बोर्डों के साथ एक केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना करना शामिल है। विधेयक का एक विवादास्पद प्रावधान जिला कलेक्टर को यह निर्धारित करने के लिए प्राथमिक प्राधिकारी के रूप में नामित करने का प्रस्ताव है कि कोई संपत्ति वक्फ या सरकारी भूमि के रूप में वर्गीकृत है या नहीं।
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