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आगरा के पत्थरों से पाकिस्तान ने सहेजे स्मारक

Mon, 09 May 2016 05:04 AM IST
अमित कुलश्रेष्ठ/अमर उजाला, आगरा
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- फोटो : Getty
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पाकिस्तान में मौजूद महाभारत काल से लेकर मुगलिया दौर तक की धरोहरों को आगरा का पत्थर सहेज रहा है। पाकिस्तान का पुरातत्व विभाग अपनी प्राचीन इमारतों को आगरा के तांतपुर और बंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से संरक्षित कर रहा है। कटासराज मंदिर कॉम्प्लेक्स और लाहौर का किला समेत दर्जन भर स्मारक ऐसे हैं, जिनके संरक्षण के लिए लाल पत्थर आगरा की इन्हीं दोनों खदानों से पहुंचाया जा रहा है।
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आगरा फोर्ट की तर्ज पर ही मुगल बादशाह अकबर ने पाक में लाहौर फोर्ट का निर्माण कराया था। इसे बाद में जहांगीर और शाहजहां ने संगमरमर से सजाया-संवारा था। इसी लाहौर फोर्ट के संरक्षण के लिए लाल पत्थरों की आपूर्ति आगरा से की जा रही है। तांतपुर, बाड़ी-बसेड़ी और बंशी पहाड़पुर बेल्ट से लाल पत्थर पाकिस्तानी स्मारकों के संरक्षण के लिए भेजे जाते हैं।

पाकिस्तान को प्राचीन स्मारकों के लिए संगमरमर तो क्वेटा की पहाड़ियों में मिल जाते हैं लेकिन लाल पत्थरों के लिए उसे आगरा की ओर रुख करना पड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि लाहौर फोर्ट और कटासराज मंदिर कॉम्प्लेक्स के रेड स्टोन तांतपुर और बंशी पहाड़पुर के पत्थरों से काफी मिलते-जुलते हैं।
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मुगलिया सल्तनत की राजधानी रहे आगरा में 197 से ज्यादा स्मारक हैं। ताजमहल, आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी, एत्माद्दौला, अकबर का मकबरा जैसे ऐतिहासिक स्मारकों के कारण आगरा पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को मुगल स्थापत्य कला का विशेषज्ञ माना जाता है।

यूनेस्को की पहल पर चार साल पहले सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत पाकिस्तानी पुरातत्व विभाग के महानिदेशक सहित एक प्रतिनिधिमंडल संरक्षण के बारे में आगरा आकर सलाह ले चुका है। पाकिस्तान के पुरातत्वविद मोहम्मद अब्दुल खान और मोहम्मद कुरैशी को कटासराज मंदिर श्रृंखला के सात मंदिरों के संरक्षण पर भारत की ओर से सुझाव दिए गए थे।

300 ट्रक लाल पत्थरों से संवारा जाना है कटासराज मंदिर
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चकवाल में कटासराज मंदिर श्रृंखला है। मान्यता है कि यहां पांडवों ने कुछ समय बिताया था और युधिष्ठिर-यक्ष के बीच प्रश्न-उत्तर यहीं हुए थे। सात मंदिर भी 650-950 ई. के हैं। इनके संरक्षण के लिए करीब 300 ट्रक लाल पत्थरों की जरूरत है। पाकिस्तानी दल ने बंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों को इसके लिए बेहतर माना था। हालांकि अभी तक आपूर्ति नहीं की गई है।

‘मुगल काल के कई स्मारकों के संरक्षण के लिए आगरा से ही पत्थरों की आपूर्ति कई जगह की गई है। पाकिस्तानी स्मारकों के संरक्षण के लिए आगरा सर्किल से कई बार सलाह भी ली गई है। पाकिस्तानी पुरातत्वविदों का प्रतिनिधिमंडल भी आगरा आकर संरक्षण और रखरखाव की जानकारी ले चुका है।’
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- भुवन विक्रम (अधीक्षण पुरातत्वविद, एएसआई, आगरा सर्किल)
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