पाकिस्तान से एक महंत 160 हिंदुओं की अस्थियां लेकर शुक्रवार को देर रात हरिद्वार पहुंच रहे हैं। वह इन अस्थियों को गंगा में विसर्जित करेंगे। महंत रामनाथ मिश्रा और उनके 14 साल का भतीजा कबीर कुमार अस्थियां लेकर बृहस्पतिवार को ही अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत आए। वे अपने साथ उन लोगों की अस्थियां लेकर भारत आएं, जिन्होंने मरने से पहले इच्छा जाहिर की थी कि उनका अस्थी विसजर्न भारत की गंगा नदी में हो। कराची स्थित पंच मुखि हनुमान मंदिर के महंत रामनाथन उनकी अस्थियों का विसर्जन हरिद्वार में करेंगे।
हिंदू श्मशान भूमि एसोसिएशन कराची के अध्यक्ष रामनाथन बुधवार को ही भारत आना चाहते थे लेकिन पाकिस्तान के कस्टम विभाग ने कुछ औपचारिकताओं के चलते उन्हें नहीं आने दिया था। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि कुल 10 लोगों ने वीजा के लिए आवेदन दिया था लेकिन उनमें से दो ही लोगों को भारत जाने की मंजूरी मिली और तकरीबन 40 कलश ऐसे थे, जिन्हें पाकिस्तान ने भारत ले जाने की अनुमति नहीं दी। दरअसल उनके परिवार वाले कलश के साथ खुद भी अस्थी विसर्जन के लिए भारत आना चाहते थे। यह पहली बार नहीं है कि महंत रामनाथन अस्थियां लेकर पाकिस्तान से भारत आए हैं। वह 2011 में भी अस्थियां लेकर भारत आए थे तब वह अपने साथ 135 कलश लाए थे।
‘यह आम प्रक्रिया है। पाकिस्तान में कई हिंदू परिवार अपने घर के सदस्य की अस्थियों को भारत भेजने के लिए मंदिर में रखवाते हैं। साथ ही कई लोग तो अपने घर में ही समाधि भी बनवा लेते हैं।’
- रामनाथन, महंत (पंच मुखि हनुमान मंदिर, कराची)