पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हवा की गुणवत्ता काफी खराब है। दमघोंटू हवा के कारण लोगों का सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शाहिद करीम ने सरकार को आड़े हाथों लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि धुंध की वर्तमान स्थिति के लिए सरकार जिम्मेदार है। अदालत ने पंजाब प्रांत के सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को 18 नवंबर के दिन बंद रखने का आदेश दिया।
पंजाब प्रांत में खराब होती जा रही हवा का मामला कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से होता है कि कई शहर घने धुंध (Smog) से घिरे हुए हैं। नाजुक स्थिति के कारण लाहौर हाईकोर्ट ने शनिवार को शैक्षणिक संस्थानों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश के अलावा सभी कार्यालयों में दो दिवसीय वर्क फ्रॉम होम (WFH) व्यवस्था लागू करने की सिफारिश भी की।
सोमवार को पारित आदेश में अदालत ने कहा, "फिलहाल शैक्षणिक संस्थान 18 नवंबर यानी शनिवार को बंद रहेंगे। अगले सप्ताह की शुरुआत में धुंध की स्थिति का आकलन करने के बाद छुट्टियां बढ़ाने के फैसले की समीक्षा की जाएगी।" अदालत ने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन घर से काम करने का भी आदेश दिया।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते, पंजाब की कार्यवाहक सरकार ने धुंध के प्रभाव को कम करने के लिए लाहौर सहित प्रांत के कई जिलों में चार दिन की सार्वजनिक छुट्टी (9 से 12 नवंबर) की घोषणा की थी। लाहौर हाईकोर्ट ने खतरनाक वायु गुणवत्ता पर लगाम लगाने के लिए तत्काल उपाय करने का फरमान सुनाया था। आदेश के बाद सरकार ने 1 नवंबर को पंजाब प्रांत में "स्मॉग आपातकाल" लागू करने का एलान किया था।
न्यायमूर्ति शाहिद करीम ने सोमवार की सुनवाई के दौरान शहर में धुंध को रोकने में विफलता के लिए लाहौर आयुक्त को भी फटकार लगाई। उन्होंने स्मॉग को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक उपाय करने में विफलता के लिए झांग, हफीजाबाद, खानेवाल, ननकाना, बहावलनगर और शेखुपुरा जिलों के आयुक्तों पर भी नाराजगी प्रकट की। बता दें कि कई हफ्तों तक लाहौर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर सबसे प्रदूषित शहरों में से एक रहा है।