India-Pakistan Tension: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना की तरफ से भारत के साथ लगी सीमाओं पर हलचल तेज कर दी गई है। बता दें कि, पाकिस्तान लगातार अपने हवाई रक्षा और तोपखाना इकाइयों को सीमा के पास भेज रहा है।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने भारत से लगी सीमा पर अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। अब पाकिस्तान लगातार अपने हवाई रक्षा और तोपखाना इकाइयों को सीमा के पास भेज रहा है।
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राजस्थान के बॉर्डर इलाकों में तैनाती
रक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने राजस्थान के लॉन्गेवाला और बारमेर सेक्टर के सामने कई एयर डिफेंस रडार और हथियार सिस्टम तैनात कर दिए हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान ने अपने एयरबेस की सुरक्षा के लिए एयरपोर्ट सिक्योरिटी फोर्स को भी सक्रिय कर दिया है।
तीन बड़े युद्धाभ्यास एक साथ
पाकिस्तान वायुसेना (पीएएफ) इस समय तीन बड़े युद्धाभ्यास कर रही है- फिजा-ए-बदर, ललकार-ए-मोमिन और जर्ब-ए-हैदरी। इन अभ्यासों में पाकिस्तान के सभी बड़े लड़ाकू विमान जैसे एफ-16, जेएफ-17 और जे-10 भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही, साब एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (एडब्ल्यूएसीएस) विमानों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ये युद्धाभ्यास 29 अप्रैल से शुरू हुए हैं।
सीमा पर चीनी हॉवित्जर तोपों की तैनाती
पाकिस्तानी सेना चीन से खरीदी गई एसएच-15 हॉवित्जर तोपों को भी अपनी आर्टिलरी रेजीमेंट में शामिल कर रही है। इन आधुनिक तोपों को अब सीमा के नजदीक तैनात किया जा रहा है। इससे पाकिस्तान की फायरिंग क्षमता काफी बढ़ गई है।
भारतीय सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने 23 अप्रैल को मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति की आपात बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पहलगाम आतंकी हमले पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें हमले के पीछे पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठनों का हाथ होने की जानकारी दी गई। बैठक में हमले की कड़ी निंदा की गई और शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई गई। सरकार ने हमले के जिम्मेदार आतंकियों और उनके समर्थकों को कड़ी सजा देने का संकल्प लिया है।
सिंधु जल संधि पर भी असर
भारत ने पाकिस्तान को सख्त संदेश देने के लिए सिंधु जल संधि को भी स्थगित करने का फैसला लिया है। यह संधि 1960 से दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर लागू थी। अब इसे रोकने का कदम पाकिस्तान पर दबाव बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है।