पुणे में पिता संतोष जगदाले को मुखाग्नि देने जाती बेटी।
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सोचा न था जिंदगी का पहला सफर, आखिरी होगा
पहलगाम हमले में मारे गए पुणे के कौस्तुभ गणबोटे के जीवन का पहला सफर ही आखिरी बन गया। स्नैक्स कारोबारी गणबोटे अपने दोस्त संतोष जगदाले के परिवार के साथ जम्मू-कश्मीर गए थे। उनके पड़ोसी सुनील मोरे ने बताया कि पूरी जिंदगी कौस्तुभ गणबोटे अपने कारोबार को बढ़ाने में व्यस्त रहे। यह पहली बार था जब उन्होंने और उनकी पत्नी संगीता ने शहर से बाहर यात्रा करने का फैसला किया था। उन्होंने अपने करीबी दोस्त संतोष और उसके परिवार के साथ मिलकर इस यात्रा की योजना बनाई थी। सिर्फ आठ दिन पहले ही उन्होंने मुझे कश्मीर की योजना के बारे में बताया था। वे वाकई बहुत उत्साहित थे।
मोरे ने बताया कि गणबोटे ने अपना पूरा जीवन रास्ता पेठ की एक संकरी गली में गुजारा और हाल ही में उन्होंने कोंढवा-सासवाड़ रोड पर एक मकान बनवाया। वे हाल ही में दादा बने थे। संतोष जगदाले गणबोटे के घनिष्ठ मित्र थे। जगदाले और गणबोटे का शव गुरुवार सुबह पुणे पहुंचा। संतोष जगदाले को उनकी बेटी असावरी ने मुखाग्नि दी।
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संतोष जगदाले के परिजनों से मिलते एनसीपी प्रमुख शरद पवार।
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यतीश परमार को श्रद्धांजलि देते गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल।
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मोरारी बापू की कथा सुनने गए पिता-पुत्र भी आतंकियों की गोलियों के शिकार
हमले में मारे गए भावनगर के यतीश परमार और उनके बेटे स्मित श्रीनगर में मोरारी बापू के प्रवचन में भाग लेने के लिए 16 अप्रैल को कश्मीर गए थे। प्रवचन में भाग लेने के बाद वे मंगलवार को पहलगाम जा रहे थे। यहां आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। यतीश परमार और उनके बेटे के पार्थिव शरीर को मुंबई से एक विमान से अहमदाबाद हवाई अड्डे पर लाया गया। उनकी पिता-पुत्र की अंतिम यात्रा एक साथ निकली तो हर आंख नम हो गई। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल ने पिता-पुत्र को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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छुट्टियां मनाने गए थे सुरेश
सूरत के ही रहने वाले सुरेश कलथिया भी अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ छुट्टियां मनाने गए थे, तभी पहलगाम में आतंकवादियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। उनकी पत्नी और बच्चे बच गये। कलथिया का पार्थिव शरीर सूरत लाया गया। गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी गुरुवार सुबह सूरत में कलथिया के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। कलथिया के परिवार ने कहा कि उनके पिता हिम्मतभाई, जो अमरेली जिले में रहते हैं, सूरत पहुंच गए हैं।
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