हाल में एक साक्षात्कार में कंपनी के मुख्य कार्यकारी रितेश अग्रवाल ने स्वीकार किया कि ओयो की वेबसाइट पर कई ऐसे होटलों के नाम हैं जो उससे जुड़े नहीं हैं। कंपनी अपने रिकॉर्ड में उनके कमरों को सोल्ड आउट (भरा हुआ) दिखाती है और होटल मालिकों को उससे जुड़ने के लिए मनाती है। कंपनी के प्रमुख (भारतीय परिचालन) आदित्य घोष ने भी एक साक्षात्कार में माना है कि कंपनी से जुड़े कई होटलों के पास जरूरी लाइसेंस नहीं हैं।
हालांकि उन्होंने अधिकारियों को मुफ्त होटल का कमरा देने से इंकार किया। घोष ने होटल मालिकों से अतिरिक्त फीस लेने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि कंपनी खराब कस्टमर सर्विस के लिए होटलों पर जुर्माना लगाती है। होटल मालिक इसका विरोध करते हैं। कर्मचारियों की शिकायतों पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसका कारण प्रशिक्षण की कमी है। ओयो के 80 फीसदी कर्मचारी एक साल पुराने भी नहीं हैं।
2013 में हुई शुरुआत
रितेश अग्रवाल ने 19 साल की उम्र में 2013 में ओयो की शुरुआत की थी। उनका मकसद देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद कम किराए वाले छोटे-बड़े होटलों को एक प्लेटफॉर्म पर लाना था। कंपनी होटलों को अपने नेटवर्क में शामिल करने के बाद अपनी वेबसाइट के जरिये उनकी ऑनलाइन बुकिंग करती है। बदले में किराये का एक हिस्सा ओयो को मिलता है। कंपनी कुछ जगहों पर अपने होटल भी चलाती है। कंपनी अब 80 देशों में फैल चुकी है और 12 लाख से ज्यादा कमरे इसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं। 20 हजार से ज्यादा कर्मचारी इसके लिए काम करते हैं।
तेज विस्तार के बावजूद ओयो अब तक मुनाफा नहीं कमा पाई है। कंपनी को 2021 के अंत तक मुनाफे की उम्मीद भी नहीं है। जापान जैसे कुछ देशों में पैर फैलाने की कंपनी की कोशिश भी नाकामयाब रही है। दिसंबर, 2019 में सॉफ्टबैंक और खुद अग्रवाल ने 1.5 अरब डॉलर का निवेश कंपनी में किया, लेकिन ठीक उसी समय कंपनी के दो अन्य बड़े शेयरधारकों ने अपने करीब आधे शेयर बेच दिए। अग्रवाल ने कर्ज लेकर ये शेयर खरीदे।
कर्मचारियों पर दबाव
कंपनी के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि यहां काम का माहौल कभी अच्छा नहीं था, लेकिन पिछले एक साल में दबाव कई गुना बढ़ा है। सौरभ मुखोपाध्याय कहते हैं कि कर्मचारियों पर नए कमरे जोड़ने का इतना दबाव होता है कि वे बिना सुविधाओं वाले होटल के नाम भी शामिल कर लेते हैं। वेबसाइट पर इनकी फर्जी तस्वीरें लगाकर ग्राहकों को लुभाया जाता है।
2014 से 2018 तक ओयो के लिए काम कर चुके सौरभ शर्मा बताते हैं कि कंपनी जानबूझकर होटल मालिकों के पैसे रोककर रखती है। कंपनी के कर्मचारी खुद भी ग्राहकों की आवाजाही के रिकॉर्ड में हेराफेरी करते हैं और अतिरिक्त कमाई करते हैं। इतना ही नहीं, पुराने कर्मचारी बदनामी से बचने के लिए कंपनी पर दुष्कर्म जैसे अपराधों को छिपाने का आरोप भी लगाते हैं।