हमारी परंपरा ने विविधता को स्वीकारा- मोहन भागवत
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत के पास दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं का समाधान है और इस बात पर जोर दिया कि देश की प्राचीन परंपरा विविधता और किसी को नकारने की धारणा में दृढ़ता से विश्वास करती है।
हमने सभी विविधताओं को किया स्वीकार- मोहन भागवत
उन्होंने कहा कि दुनिया भर के विचारकों का मानना है कि भौतिकवादी विकास अपने चरम पर है और यह मानवता को विनाश की ओर ले जा रहा है। आरएसएस नेता ने पूछा, इसका उत्तर क्या है? और फिर कहा, हमारी परंपरा में इसका उत्तर है, क्योंकि हम सभी विविधताओं को स्वीकार करते रहे हैं। किसी को अस्वीकार नहीं किया और सभी को स्वीकार किया।
दुनिया का पथप्रदर्शक बनने का लें संकल्प- संघ प्रमुख
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नागपुर में आरएसएस विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर दयाशंकर तिवारी मौन की तरफ से लिखी गई पुस्तक के विमोचन के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब भारत उठ खड़ा होगा तो लड़खड़ाती दुनिया को रास्ता मिल जाएगा।
दुनिया वास्तव में एक है- भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के प्राचीन ऋषियों ने स्पष्ट रूप से समझा था कि दुनिया वास्तव में एक है, जबकि हम जबरदस्ती दुनिया को एक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा, दुनिया वास्तव में एक है, लेकिन यह विविधता चाहती है, इसलिए विविधता है। विविधता को हटाओ और एक हो जाओ - यह आगे बढ़ने का तरीका नहीं है। विविधता में रहते हुए हमें समझना चाहिए कि हम एक हैं। विविधता एक बिंदु तक जाती है जिसके बाद एकता होती है।
'वह बदलाव बनो जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं'
महात्मा गांधी का हवाला देते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा, वह बदलाव बनो जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं। आप वही बनो जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में वैश्विक समुदाय के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करने की क्षमता है। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा, हम सभी को दुनिया का पथप्रदर्शक बनने का संकल्प लेना चाहिए।