उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस साल के अंत तक बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) के पूर्ण उन्मूलन और मध्यम तीव्र कुपोषण (MAM) को कम करने के लिए एक प्रभावी कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। जाजपुर जिले के दानागड़ी ब्लॉक में कथित तौर पर कुपोषण से 11 बच्चों की मौत को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित किया।
कुपोषित बच्चों को दो वर्गों में बांटा गया है। एसएएम के तहत आने वाले बच्चे रेड जोन में माने जाते हैं। इनमें संक्रमण का उच्च जोखिम होता है और गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। जबकि एमएएम के तहत आने वाले बच्चों में कुपोषण के लक्षण दिखते हैं, लेकिन ये येलो जोन में होते हैं और इनका जीवन खतरे में नहीं होता है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मुख्य सचिव को अगले महीने एक बैठक बुलानी चाहिए और 2023 के अंत तक राज्य में एसएएम बच्चों की संख्या को पूरी तरह से कम करने और एमएएम बच्चों की संख्या को आधे से कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करनी चाहिए।
अदालत ने महिला एवं बाल विकास, स्कूल एवं जन शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आदिवासी कल्याण, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण विभागों के सचिवों को एक माह के भीतर बैठक कर कार्ययोजना तैयार करने तथा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इस दिशा में काम शुरू करने को कहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव ने बताया कि ओडिशा में लगभग 36 लाख बच्चे हैं, जिनमें से 28,541 (अप्रैल, 2023 तक) एसएएम श्रेणी में और लगभग 86,000 एमएएम श्रेणी में बताए गए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ओडिशा में 2023 में लगभग 30,000 एसएएम और 86,000 एमएएम बच्चे होना न केवल राज्य सरकार के लिए बल्कि भारत सरकार के लिए भी चिंता का कारण है।
याचिकाकर्ता ने जाजपुर जिले के दानागढ़ी और सुकिंदा ब्लॉक में बच्चों में कुपोषण की स्थिति का जिक्र किया और कहा कि ओडिशा में अन्य जिलों में भी कुपोषण की स्थिति खराब या बदतर हो सकती है। हाईकोर्ट ने क्योंझर जिले को शामिल करने के लिए याचिका का दायरा बढ़ा दिया और इसके कलेक्टर और सीडीएमओ को एसएएम और एमएएम श्रेणियों में बच्चों के बारे में तथ्यात्मक स्थिति का पता लगाने के लिए अगले एक महीने में ब्लॉक का दौरा करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई एक अगस्त, 2023 को होगी।