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कोरोना का असर: ट्रेन-प्लेन बुक किया हो या होटल, महज 12-13 फीसदी लोगों को ही समय पर मिला रिफंड

Sun, 08 Aug 2021 06:36 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

2020 में हुए लॉकडाउन के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस को 15 दिनों के भीतर टिकट की पूरी रकम वापस करने का आदेश दिया था। केवल ऐसे वाहक जो वित्तीय संकट में थे, उन्हें यात्रियों को क्रेडिट प्रदान करने का आदेश दिया गया था, जिसे बाद में भुनाया जा सके।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अप्रैल और मई में अपने पीक पर पहुंचने वाली कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने सभी को प्रभावित किया। इस दौरान कई लोगों को अपनी यात्रा को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। देश के सबसे पड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल्स (LocalCircles) ने एक सर्वे किया। सर्वे में लोगों उन मुद्दों के बारे बात की, जिनका सामना उन्होंने टिकट और होटल बुकिंग को रद्द करने के दौरान किया। इस सर्वे में शामिल लोगों में से सिर्फ सिर्फ 12-13 फीसदी लोगों को ही समय से रिफंड मिला। इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि 90 फीसदी लोगों का मानना है कि सरकार को नई रिफंड पॉलिसी बनानी चाहिए।

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दूसरी लहर के दौरान और उसके बाद भी कुछ ट्रैवल एजेंटों (ऑनलाइन और ऑफलाइन), एयरलाइनों और होटलों ने कोई रिफंड नहीं किया, जिससे लोगों को पूरी बुकिंग राशि से हाथ धोना पड़ा। कुछ लोगों को आंशिक राशि वापस की गई और अन्य को बाद की तारीख के लिए उड़ानों और होटल में ठहरने के लिए बुकिंग सुविधा दी गई। इसने अप्रैल में नागरिक उड्डयन मंत्रलय को यात्रियों के क्रेडिट शेल की वापसी के संबंध में एयरलाइंस के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करने के लिए प्रेरित किया। 

कुछ एयरलाइनों ने घरेलू उड़ानों पर परिवर्तन शुल्क माफ कर दिया, जबकि कुछ अन्य ने मुफ्त रद्दीकरण और उड़ानों का पुनर्निर्धारण प्रदान किया। गौरतलब है कि 2020 में हुए लॉकडाउन के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस को 15 दिनों के भीतर टिकट की पूरी रकम वापस करने का आदेश दिया था। केवल ऐसे वाहक जो वित्तीय संकट में थे, उन्हें यात्रियों को क्रेडिट प्रदान करने का आदेश दिया गया था जिसे बाद में भुनाया जा सकता है।
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एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय समिति ने विमानन मंत्रालय को रद्दीकरण शुल्क को युक्तिसंगत बनाने और यात्रियों से ली जा जाने वाली राशि को निर्धारित करने की आवश्यकता के बारे में बताया। इसके साथ-साथ हवाई अड्डे पर रियायतें कैसे दी जाती है, इस पर पूरे ढांचे को देखने की आवश्यकता के बारे में भी बताया गया। 

इस संबंध में लोकलसर्किल्स को नागरिकों से बहुत सारी प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जो कम से कम कोरोना महामारी के दौरान एयरलाइंस, ट्रेनों, होटलों और अन्य द्वारा रद्दीकरण शुल्क को विनियमित करने की आवश्यकता का सुझाव देती हैं। इस मुद्दे का संज्ञान लेते हुए लोकलसर्किल्स ने इस मुद्दे की भयावहता का आकलन करने के लिए एक सर्वेक्षण किया है कि लोगों को दूसरी लहर के कारण रिफंड के लिए किन मुसीबतों का सामना करना पड़ा। सर्वे में 4 सवाल पूछे गए, देखिए उन पर लोगों की प्रतिक्रियाएं...

1. गर्मियों में लोगों ने जिन फ्लाइट सर्विस में बुकिंग की, उनमें कैंसिलेशन प्रक्रिया कैसे काम करती है?

  • कुल प्रतिक्रियाएं - 8,713
  • ट्रैवल एजेंस या एयरलाइंस कैंसिलेशन स्वीकार करते हैं और पूरा रिफंड करते हैं - 12%
  • आंशिक रिफंड करते हैं - 12%
  • बहुत कम राशि वापस की जाती है - 4%
  • रिफंड की जगह नई तारीख पर बुकिंग की सुविधा दी जाती है - 24%
  • कुछ भी रिफंड नहीं होता - 32%
  • कुछ कह नहीं सकते - 16%

2. गर्मियों में लोगों ने जिन होटलों में बुकिंग की, उनमें कैंसिलेशन प्रक्रिया कैसे काम करती है?

  • कुल प्रतिक्रियाएं - 8,594
  • ट्रैवल एजेंस या होटल ने कैंसिलेशन स्वीकार करते हैं और पूरा रिफंड करते हैं - 17%
  • आंशिक रिफंड होता है - 17%
  • रिफंड की जगह नई तारीख पर बुकिंग की सुविधा दी जाती है - 13%
  • कुछ भी रिफंड नहीं करते - 44%
  • कुछ कह नहीं सकते - 13%

3. क्या कोरोना के दौरान सरकार की ओर से खास बुकिंग कैंसिलेशन पॉलिसी लाई जानी चाहिए, जो एयरलाइंस, रेलवे, होटल और अन्य पर लागू हों? जिससे लॉकडाउन और कैंसिलेशन की प्रक्रिया तेज और न्यायसंगत बन सके।

  • कुल प्रतिक्रियाएं - 10,633
  • हां - 90%
  • नहीं - 3%
  • पता नहीं - 7%

4. कोरोना की पाबंदियों और खतरों की वजह से कैंसिल की गई कार्यक्रम के रिफंड को लेकर न्यायसंगत रिफंड क्या होगा?

  • कुल प्रतिक्रियाएं - 9,662
  • 50% वैल्यू प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में काटकर तत्काल रिफंड किया जाए - 3%
  • 20% प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में काटकर हफ्तेभर के अंदर रिफंड किया जाए - 21%
  • 10% प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में काटकर एक महीने के अंदर रिफंड किया जाए - 30%
  • 5% प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में काटकर 6 महीने के अंदर रिफंड किया जाए - 6%
  • रिफंड की जगह बाउचर जारी किया जाए, जिसका इस्तेमाल अगले 2 साल के अंदर किया जा सके - 21%
  • अन्य मॉडल - 8%
  • मौजूदा रिफंड सिस्टम ठीक है - 5%
  • कुछ की नहीं सकते -  7%

359 जिलों के 37,000 लोगों के जरिए हुआ सर्वे
भारत के 359 जिलों से 37,000 लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं। इसमें 64% पुरुष थे, जबकि 36% महिलाएं थीं। 47% लोग टियर-1, 30% टियर-2 और 23% लोग टियर-3, 4 और ग्रामीण जिलों से थे। सर्वे लोकलसर्किल्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया गया था। इसमें भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी मान्य नागरिक थे, जिनके लिए पंजीकरण अनिवार्य था।

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