कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रॉन ने भारत में दस्तक दी है। कर्नाटक में 66 और 46 साल के दो व्यक्तियों में इसकी पुष्टि हुई है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि बेंगलुरु में डॉक्टर 46 वर्षीय इस मरीज के संपर्क में आने वाले तीन और उनके संपर्क में आने वाले दो लोग भी संक्रमित हैं। इस मरीज की विदेश यात्रा का कोई इतिहास नहीं है। अन्य संक्रमितों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं। वहीं, गुजरात में जिम्बाब्वे से लौटे एक बुजुर्ग को भी संदिग्ध माना गया है।
इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि कर्नाटक के दोनों मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण हैं। उन्होंने कहा, ओमिक्रॉन से घबराने की जरूरत नहीं है। कोविड सतर्कता नियमों का पालन कर वायरस के किसी भी स्वरूप से बचा जा सकता है। अग्रवाल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन का हवाला देते हुए कहा, टीकाकरण के जरिये नए स्वरूप का असर कम किया जा सकता है। उन्होंने अपील की, जिन्होंने अब तक वैक्सीन नहीं ली है वह जल्द लगवा लें। दूसरी खुराक भी जल्द ले लें।
आंकड़ों के अनुसार, एक दिसंबर सुबह 8 बजे तक 37 फ्लाइट भारत आईं, जिनमें 7,976 यात्री पहुंचे। इनमें 10 संक्रमित मिले। इनके सैंपलों की जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जा रही है। बुधवार को 1,502 लोग आए। इनमें संक्रमण नहीं मिला। 30 से अधिक हवाईअड्डों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए इन्साकॉग की लैब से जोड़ दिया गया है।
केंद्र सरकार ने दावा किया कि ओमिक्रॉन के दोनों मरीजों को चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है, जबकि इस दावे के कुछ देर बाद बेंगलुरु महानगर पालिका ने बयान जारी किया, 20 नवंबर को आया 66 वर्षीय मरीज 27 नवंबर को ही देश से जा चुका है।
देश में प्रवेश के रास्तों पर निगरानी
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ओमिक्रॉन के खतरे को लेकर एयरपोर्ट तथा बंदरगाह अधिकारियों के साथ बैठक की, ताकि देश में प्रवेश के रास्तों पर वायरस की निगरानी की जा सके।
संसद में चर्चा : कोरम भी पूरा नहीं हुआ, बजानी पड़ी घंटी
जनप्रतिनिधियों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लग सकता है कि लोकसभा में ओमिक्रॉन पर चर्चा के समय सदन का कोरम भी पूरा नहीं था। कोरम पूर्ण करने के लिए घंटी बजानी पड़ी।
दूसरी लहर वाले डेल्टा से पांच गुना अधिक तेज
दुनिया भर में 29 देशों में अब तक ओमिक्रॉन के 373 मामले सामने आ चुके हैं। नया स्वरूप डेल्टा की तुलना में करीब 5 गुना अधिक तेजी से प्रसारित होने की क्षमता रखता है। डेल्टा स्वरूप के साथ इसकी तुलना की जाए, तो वायरस के स्पाइक प्रोटीन में 45 से 52 तक म्यूटेशन (परिवर्तन) दर्ज किए गए हैं।
नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के निदेशक डॉ. सुजीत कुमार के अनुसार, भारत में 9% में अल्फा, 0.44% में बीटा, 0.004% में गामा और डेल्टा से जुड़े एवाई के 17 फीसदी मामले दर्ज हुए। कप्पा व अन्य वैरिएंट के 11% मामले हैं।
- 10 राज्यों के 18 जिलों में संक्रमण दर अभी 5 से 10 फीसदी के बीच है।
- 79.16 करोड़ (84.30%) वयस्क आबादी को पहली 45.92 करोड़ (49%) को दूसरी खुराक दी जा चुकी है।
मास्क, टीकाकरण ही बेहतर विकल्प
मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर यही कहा जा सकता है कि मास्क, दो गज की दूरी और टीकाकरण ही सबसे बेहतर विकल्प है। अब सबसे बड़ी लड़ाई आम नागरिकों की है। महामारी को फैलने से रोकने के लिए नियमों का पालन करना होगा। -डॉ. वीके पॉल, नीति आयोग के सदस्य