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London: जब सुधा मूर्ति का पता देखकर हैरान रह गए थे अधिकारी, 10 डाउनिंग स्ट्रीट से जुड़ा है दिलचस्प किस्सा

Mon, 15 May 2023 08:26 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

पहली बार लोकप्रिय शो में शामिल हुईं सुधा मूर्ति ने अपने जीवन से जुड़े कई किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें केवल सलवार-कमीज पहनने पर कैटल क्लास का कह दिया गया था। साथ ही कैसे ब्रिटिश हवाईअड्डे पर अप्रवासन अधिकारी लंदन में उनका पता 10 डाउनिंग स्ट्रीट जानकर हैरान रह गए थे। 
 
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एनआर नारायणमूर्ति, सुधा मूर्ति। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिग्गज आईटी कंपनी के मालिक नारायण मूर्ति की पत्नी और ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक की सास सुधा मूर्ति इन दिनों चर्चा में हैं। हालांकि वे किसी हाईप्रोफाइल मामले नहीं बल्कि अपनी सादगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी सादगी ऐसी है कि उन्हें देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि वे ब्रिटेन के पीएम की सास हैं। हाल ही में एक टीवी कॉमेडी शो में शामिल हुईं, जहां उन्होंने अपने जीवन की कई यादों को साझा किया। जिसके बाद लोग उनकी सादगी के बारे में चर्चा कर रहे हैं। 

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सुधा मूर्ति ने साझा की यादें
पहली बार इस लोकप्रिय शो में शामिल हुईं सुधा मूर्ति ने अपने जीवन से जुड़े कई किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें केवल सलवार-कमीज पहनने पर कैटल क्लास का कह दिया गया था। साथ ही कैसे ब्रिटिश हवाईअड्डे पर अप्रवासन अधिकारी लंदन में उनका पता 10 डाउनिंग स्ट्रीट जानकर हैरान रह गए थे। 

जब लंदन में हवाई अड्डे पर अधिकारी सुधा मूर्ति का पता जानकर रह गए हैरान
इस शो के एक हालिया एपिसोड के दौरान सुधा मूर्ति ने एक आव्रजन अधिकारी के बारे में एक किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा कि अधिकारी ने लंदन में हवाईअड्डे पर फॉर्म में पते की जगह पर 10 डाउनिंग स्ट्रीट लिखने पर उसने इस पर विश्वास करने से इनकार कर दिया था।
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वह अपनी बेटी से मिलने ब्रिटेन गई थीं। एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ऑफिसर ने उनसे रेजिडेंशियल एड्रेस के बारे में पूछा। उनसे पूछा गया था कि लंदन में वह कहां रहने वाली हैं। सुधा की बड़ी बहन भी उनके साथ थीं। दोनों को लगा कि उन्हें 10 डाउनिंग स्ट्रीट लिखना चाहिए।

उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले वे लंदन में अपनी बेटी से मिलने गई थीं। वहां हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन ऑफिसर ने मुझसे रेजिडेंशियल एड्रेस के बारे में पूछा। उसने पूछा कि लंदन में वे कहां रहने वाली हैं? उस समय मेरी बड़ी बहन भी मेरे साथ थी। तब हमें लगा कि हमें '10 डाउनिंग स्ट्रीट' लिखना चाहिए। इसके बाद फार्म में मैंने अपना पता '10 डाउनिंग स्ट्रीट' लिख दिया। उन्होंने कहा हालांकि मेरा बेटा भी वहीं (यूके में) रहता है, लेकिन मुझे उसका पूरा पता याद नहीं था। इसलिए, मैंने अपनी बेटी का पता लिख दिया।

अधिकारी रह गया भौंचक्का
जब अधिकारी ने फार्म देखा तो वह भौंचक्का रह गया। उन्होंने बताया कि अधिकारी ने अविश्वसनीयता से भरी नजरों से देखते हुए पूछा कि क्या आप मजाक कर रही हैं?  इस पर मैंने कहा कि नहीं मैं सच बोल रही हूं। बाद में जब उसे पता चला कि मैं उनके देश के पीएम की सास हूं तो उन्हें भरोसा हुआ। 

अपने इस अनुभव को बताते हुए उन्होंने आगे कहा कि दिखावे में धोखा हो सकता है। लोगों के रूप-रंग के आधार पर उनके बारे में धारणा बनाना आसान है, लेकिन वे धारणाएँ अक्सर गलत साबित हो सकती हैं।

कैटल क्लास बोले जाने वाला किस्सा भी सुनाया
इस शो में सुधा मूर्ति ने हवाई अड्डे पर हुई एक और घटना के बारे में खुलासा किया, जहां एक साथी यात्री ने उनकी पोशाक के लिए उन्हें 'कैटल-क्लास' कहा था। उन्होंने बताया कि चार-पांच साल पहले मैं सलवार कमीज पहन कर यात्रा कर रही थी। मेरे पास बिजनेस क्लास का टिकट था। मैं उस लाइन में खड़ी थी, तो उनको लगा कि सलवार कमीज पहन लिया तो दीदी है, बहनजी है...अरे कैटल-क्लास लोग है। उनको क्या पता है इकोनॉमी के लोगों को बिजनेस क्लास में आने में..मैंने जाके उनको पूछ लिया कि कैटल-क्लास क्या है?"

सुधा ने आगे कहा कि किसी की क्लास इस बात से परिभाषित नहीं होती है कि उसके पास कितना पैसा है। उन्होंने गणितज्ञ मंजुल भार्गव और मदर टेरेसा का उदाहरण दिया और कहा कि वो अपने योगदान के कारण 'क्लास' शब्द की वास्तविक परिभाषा थे।  

ब्रिटिश पीएम की सास हैं सुधा मूर्ति
सुधा मूर्ति भारतीय मूल के पीएम ऋषि सनक की सास हैं, जिन्होंने पिछले साल सितंबर में यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री के रूप में पदभार संभाला था। उनकी बेटी अक्षता मूर्ति की शादी सुनक से हुई है।

गौरतलब है कि सुधा मूर्ति इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। उन्होंने करीब 33 किताबें लिखी हैं और इंफोसिस फाउंडेशन के जरिए 60 हजार लाइब्रेरी की स्थापना की है। साथ ही स्कूलों का निर्माण भी करवाया है। हाल ही में भारत में तीसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। साहित्य और सामाजिक कार्यों में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है। 

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