जनवरी में स्वास्थ्य मंत्री नब किशोर दास की एएसआई ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से हत्या कर दी थी। वहीं अब चार महीने बाद ओडिशा क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। झारसुगुड़ा जेएमएफसी कोर्ट में चार्जशीट पेश करते हुए बताया कि 29 जनवरी की घटना में गोपाल दास अकेला आरोपी है और हत्या पुरानी दुश्मनी के कारण की थी। आरोपी पर धारा 307 (हत्या का प्रयास), 302 (हत्या) और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए गए हैं।
अगर अदालत में उसके ऊपर लगे आरोप साबित हो जाते हैं तो एएसआई गोपालकृष्ण दास को दस साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है और जुर्माना लगाया जा सकता है। इस मामले में 543 पन्नों का आरोपपत्र ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा ने शुक्रवार को झारसुगुड़ा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत में दायर किया। गोपाल दास के खिलाफ आरोप चश्मदीदों के बयानों और एक वैज्ञानिक टीम की रिपोर्ट पर आधारित है।
हत्या के पीछे के मकसद की जांच के लिए मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया था। इससे पहले बताया गया था कि गोपालकृष्ण दास एक मनोचिकित्सक से मानसिक बीमारी बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज करा रहा था। उसने झारसुगुड़ा जिले के आधिकारिक दौरे पर आए मंत्री पर ब्रजराजनगर गांधी चौक पर कथित तौर पर गोलियां चलाई थीं जिनकी मौत हो गई।
चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी ने सावधानीपूर्वक योजना बनाई और अकेले ही हत्या को अंजाम दिया। इस घटना में किसी और का कोई षड्यंत्र या समर्थन नहीं था। इसमें कहा गया है कि नार्को परीक्षण और आवाज विश्लेषण से पुष्टि हुई कि पुलिस अधिकारी ने व्यक्तिगत रंजिश के कारण बंदूक से हत्या की थी।
आरोपी गोपालकृष्ण दास गंजाम जिले के जलेश्वरखंडी गांव के रहने वाला था। उसने बेरहामपुर में एक कांस्टेबल के रूप में पुलिस में अपना करियर शुरू किया था और बाद में 12 साल पहले झारसुगुड़ा जिले में स्थानांतरित कर दिया गया। झारसुगड़ा एसडीपीओ गुप्तेश्वर भोई ने कहा कि ब्रजराजनगर क्षेत्र के गांधी चौक में एक पुलिस चौकी का प्रभारी बनाए जाने के बाद एएसआई को लाइसेंसी पिस्तौल जारी की गई थी।