दिलीप सामंत्रे को शुरू में 30 दिसंबर को मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन शुक्रवार को उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल की सीईओ डॉ. स्मिता पाधी ने बताया कि उनकी शनिवार दोपहर को मौत हो गई। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका। मरीज के दिल की धड़कन और ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो गया था। प्रक्रिया के अनुसार हम शव को पुलिस को सौंप देंगे। अगर जरूरत पड़ी तो डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। हम नमूने एकत्र करेंगे।'
विस्फोट 29 दिसंबर की शाम को हुआ था। इसमें घायल हुए चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। मृतकों में श्रीतम साहू (29 वर्षीय), दिलीप सामंत्रे (34 वर्षीय) और ज्योति रंजन मलिक (34 वर्षीय) शामिल हैं। सभी अस्पताल में एसी मेंटेनेंस के लिए एक फर्म के कर्मचारी थे।
सामंत्रे खुर्दा जिले के निवासी थे। उन्हें 30 दिसंबर को मृत घोषित कर दिया गया था और एक शव को उनके परिजनों को सौंप दिया गया था। उनके परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। अगले दिन सामंत्रे की पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। यह शव ज्योति रंजन मलिक का था। डॉक्टरों ने कहा कि भ्रम की स्थिति इसलिए पैदा हो गई, क्योंकि अस्पताल की छत पर हुए विस्फोट के कारण लोगों के चेहरे झुलस गए थे। सामंत्रे की मां ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को अस्पताल ने मार डाला।
पहले शव के दाह संस्कार पर उन्होंने कहा, डॉक्टरों ने हमें एक अलग शव दिया। हमने उन पर भरोसा किया और उनका अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार खत्म होने के बाद अस्पताल के अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि दिलीप जीवित है। इसके बाद हम अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से अनुरोध किया कि मुझे मेरे बेटे से मिलने की अनुमति दी जाए। दिलीप की मां ने कहा, जब मैंने उसे उसके नाम से बुलाया, तो उसने अपना सिर हिलाकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बहू की आत्महत्या से मौत के बाद परिवार को इस खबर से सांत्वना मिली कि सामंत्रे जीवित थी। लेकिन, सारी उम्मीदें फिर से टूट गईं। दिलीप के भाई ने आरोप लगाया कि उसकी मौत चिकित्सकीय लापरवाही से हुई है।
हाईटेक अस्पताल की सीईओ डॉ. स्मिता पांधी ने दावा किया कि आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा पहचान किए जाने के बाद ही चारों मरीजों का इलाज शुरू हुआ। उन्होंने कहा, 'अगर किसी की गलत पहचान की जाती है तो हम शायद ही कुछ कर सकते हैं।' अस्पताल ने गलत पहचान के लिए परिवार को भी दोषी ठहराया और डीएनए परीक्षण करने की पेशकश की।
भुवनेश्वर के पुलिस उपायुक्त प्रतीक सिंह ने कहा है कि एसीपी रैंक का एक अधिकारी मामले की जांच करेगा। विपक्षी भाजपा ने इस गड़बड़ी के लिए अस्पताल के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और पीड़ित परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। कांग्रेस नेता निशिकांत मिश्रा ने भी घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।