महाराष्ट्र में शनिवार को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार ऐसा रुख नहीं अपनाएगी, जिससे आरक्षण प्रदान करते समय अन्य पिछड़ा वर्ग और मराठों के बीच टकराव पैदा हो। फडणनवीस चंद्रपुर पहुंचे थे और उन्होंने ओबीसी समुदाय के सदस्यों से बातचीत की, जो आरक्षण उद्देश्यों के लिए मराठों को ओबीसी खंड में शामिल नहीं करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के छात्र विंग के प्रमुख रवींद्र टोंगे से मुलाकात की, जो पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने कलेक्टरेट के सामने जूस की पेशकश की, जिसके बाद टोंगे ने अपना धरना समाप्त कर दिया। फडणवीस के साथ कैबिनेट मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, विधायक किशोर जोर्गेवार, विधायक कीर्तिकुमार भांगड़िया, राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाड़े और अन्य लोग थे।
किसी के साथ नहीं होगा अन्याय
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए, फड़नवीस ने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मराठों और ओबीसी के लिए आरक्षण प्रदान करने के बारे में बहुत सकारात्मक हैं। सरकार किसी भी समुदाय के साथ अन्याय नहीं करेगी और उनके बीच संघर्ष पैदा नहीं करेगी।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ओबीसी से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और समुदाय के विकास के लिए धन उपलब्ध कराया जाएगा। फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार ने ओबीसी के पक्ष में फैसले लिए हैं, जिनमें विदेश में शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और समुदाय के युवाओं के लिए छात्रावास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि छात्रावासों के लिए इमारतें पट्टे पर ली जाएंगी।
पीएम मोदी ने भी समुदाय के हित में लिए हैं फैसले
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एक अलग ओबीसी मंत्रालय स्थापित किया गया था। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि ओबीसी के लिए योजनाएं केंद्रित तरीके से चलाई जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समुदाय के हित में फैसले लिए हैं।
उन्होंने कहा, पहले सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी के लिए कोई आरक्षण नहीं था, लेकिन 70 साल बाद पहली बार मोदी ने समुदाय को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया है। ओबीसी के लिए 10 लाख घरों की योजना बनाई गई है। फड़णवीस ने कहा, राज्य सरकार की राज्य में बेघर और गरीब ओबीसी को घर उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ से सरकार के साथ समन्वय करने का आग्रह किया।