डोभाल और आंग ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात की। इसी के साथ डोभाल ने अपने समकक्ष को म्यांमार में जारी हिंसा को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया। दरअसल, नागालैंड और मणिपुर समेत भारत के अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के साथ म्यांमार 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल म्यांमार दौरे पर है। उन्होंने म्यांमार के समकक्ष एडमिरल मो आंग से मुलाकात की। डोभाल ने म्यांमार में हिंसा और अस्थिरता को लेकर भारत की चिंताओं पर प्रकाश डाला। वह फिलहाल BIMSTEC समूह के सदस्य देशों के सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में भाग लेने के लिए म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ में हैं। बता दें कि म्यांमार में 2021 में तख्तापलट के बाद से ही वहां लोकतंत्र की बहाली को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी है। म्यांमार के कई इलाकों में सैन्य जुंटा और प्रतिरोध बलों के बीच झड़प देखी जा रही है। प्रतिरोधी बलों ने कई इलाकों में कब्जा कर लिया है।
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भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "एनएसए अजीत डोभाल आज नेपीतॉ में आयोजित #BIMSTEC की चौथी वार्षिक बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कल म्यांमार की के एनएसए एडमिरल मो आंग से मुलाकात की। इसके अलावा BIMSTEC सुरक्षा प्रमुखों ने प्रधानमंत्री मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की।"
म्यांमार में जारी हिंसा से भारत चिंतित
ऐसा बताया जा रहा है कि डोभाल और आंग ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बात की। इसी के साथ डोभाल ने अपने समकक्ष को म्यांमार में जारी हिंसा को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया। दरअसल, नागालैंड और मणिपुर समेत भारत के अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के साथ म्यांमार 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। प्रतिरोध बलों ने म्यांमार के ज्यादातर इलाकों में कब्जा कर लिया है।
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अजीत डोभाल गुरुवार को म्यांमार पहुंचे थे। यहां पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले वियतनाम की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव गुयेन फु ट्रोंग के राजकीय अंतिम संस्कार में भाग लिया। बता दें कि पिछले हफ्ते ही यहां उनका (ट्रोंग) निधन हो गया था। बता दें कि BIMSTEC एक क्षेत्रीय संगठन है, जो आर्थिक विकास, व्यापार, परिवहन, ऊर्जा और आतंकवाद विरोधी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों को जोड़ता है। इसका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत और आर्थिक विकास बढ़ावा देना है। बता दें कि इसमें भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान, थाईलैंड, नेपाल और श्रीलंका शामिल है।