इस सम्मेलन में आने का न्योता पाकिस्तान और चीन को भी भेजा गया था, लेकिन पाकिस्तान ने आने से मना कर दिया। जबकि भारत के लगातार संपर्क में रहने के बावजूद चीन ने भी आने में आनाकानी दिखाई। अब रूस, ईरान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजकिस्तान के एनएसए सम्मेलन में मौजूद रहेंगे। एनएसए अजीत डोभाल इसकी अध्यक्षता करेंगे और इस विशेष परिचर्चा में वह भारतीय हितों को लेकर मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे।
इस संवाद के दौरान अफगानिस्तान से अमेरिका की सैन्य वापसी और तालिबान के हाथ में सत्ता आने के बाद वहां पैदा हुई चुनौतियों व उनके समाधान पर चर्चा की जाएगी। चर्चा के मुख्य बिंदुओं में क्षेत्रीय आतंकवाद, ड्रग तस्करी, सीमापार से घुसपैठ, समुद्री रास्ते से बढ़ते खतरे समेत तमाम मुद्दे शामिल हैं। इस संवाद के आयोजन का मकसद अफगानिस्तान में अस्थिरता के दौर से पैदा हो रही सुरक्षा चिंताओं का समाधान तथा इसके दुष्प्रभाव से अपने देशों के हितों को बचाना है।