शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। नोएडा इस मामले में भाग्यशाली है। यह शहर स्मार्ट सिटी की लिस्ट में नहीं है, लेकिन कई स्मार्ट सिटी से भी आगे है। वजह, यहां लगातार विकास कार्यों का चलते रहना है। यही नहीं कई प्रोजेक्टों का लोकार्पण भी हो चुका है।
दरअसल, जिन शहरों में नगर निगम हैं। वही स्मार्ट सिटी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें मानक पर तौला जाता है, लेकिन नोएडा में नगर निगम नहीं है। लिहाजा, नोएडा की ओर से स्मार्ट सिटी का दर्जा पाने के लिए आवेदन ही नहीं किया गया।
इसके अलावा स्मार्ट सिटी का दर्जा पाने के लिए शहर के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये मिलते। शायद इस मामले में भी नोएडा अन्य शहरों से आगे है, क्योंकि यहां पहले से ही इतने विकास कार्य चल रहे हैं कि इसका बजट 100 करोड़ के मुकाबले काफी बड़ा है।
एक्सप्रेसवे का मिल चुका है तोहफा
नोएडा प्राधिकरण में चीफ आर्किटेक्ट प्लानर रह चुके और फिलहाल आगरा में नियुक्त एससी गौड़ का कहना है कि उनके समय में ही स्मार्ट सिटी के लिए आवेदन मांगा गया था, लेकिन नगर निगम का दर्जा नहीं होने की वजह से आवेदन नहीं किया गया।
नोएडा के विकास के लिए शुरू से ही ध्यान दिया गया। यही वजह है कि यहां विकास कार्यों के लिए बजट की कभी कमी नहीं रही। उस दौरान मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेंट ने शहरों की एक सूची भी जारी की थी,जिनके पास स्मार्ट सिटी का दर्जा पाने का मौका था। हालांकि इसके लिए कई शर्तों को पूरा किया जाना था। इस बारे में प्राधिकरण के पूर्व टाउन प्लानर राजपाल कौशिक बताते हैं कि नोएडा पहले से ही स्मार्ट सिटी की राह पर है। यहां पहले से ही इतने प्रोजेक्ट चल रहे हैं कि स्मार्ट सिटी का फंड कुछ भी नहीं है।
नोएडा में इस समय ये प्रोजेक्ट च रहे हैं एलिवेटेड रोड, कई अंडरपास, पार्क, स्टेडियम, सड़क का काम, मेट्रो प्रोजेक्ट, रोटरी इंटरचेंज सहित कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। शहर को पहले से ही एक्सप्रेसवे का तोहफा मिल चुका है, जो एक बेहतरीन प्रोजेक्ट में शामिल है। इसके अलावा शहर को चमकाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाया जाएगा। इसकी घोषणा पहले ही हो चुकी है। ऐसी सुविधा वाला नोएडा यूपी का दूसरा शहर होगा।