शीर्ष कोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रहा था जिसमें सीबीआई के क्षेत्राधिकार को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि यदि उसने सीबीआई को किसी मामले की जांच के लिए निर्देशित किया है तो जांच एजेंसी पर राज्यों के सीमा क्षेत्र की कोई बंदिश नहीं लागू होगी और केस की जांच के लिए जरूरत पड़ने पर सीबीआई का क्षेत्राधिकार पूरा भारत होगा।
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जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा, हम इस बारे में स्पष्ट हैं, एक बार इस अदालत ने सीबीआई को अपराध की जांच के लिए नियुक्त कर दिया उसका क्षेत्राधिकार इस कोर्ट के आदेश के प्रभाव पर निर्भर होगा। पीठ ने आगे कहा, यदि नियुक्ति इस कोर्ट द्वारा की गई हो तो सीबीआई के अधिकार क्षेत्र की कोई सीमा नहीं होगी।
शीर्ष कोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रहा था जिसमें सीबीआई के क्षेत्राधिकार को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।
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हाईकोर्ट ने पटियाला के सीबीआई के स्पेशल जज द्वारा 2016 में पारित आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया था। सीबीआई के स्पेशल जज के सामने याचिकाकर्ताओं ने ये तर्क रखा था कि सीबीआई ने उनके खिलाफ जो मुकदमा दर्ज किया है वो उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। इस मामले में सीबीआई ने पंजाब में एक व्यक्ति के कथित अपहरण और हत्या के मामले की प्राथमिकी जम्मू में दर्ज की थी।
सीबीआई ने स्पेशल जज की कोर्ट में ये पक्ष रखा था कि उसने प्राथमिक जांच नवंबर 1995 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के कारण की है और कई जांचों के बोझ के कारण प्राथमिकी जम्मू में दर्ज की गई। स्पेशल जज ने सीबीआई के तर्क को मान लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में शुक्रवार को ये पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि उसके द्वारा दिए गए आदेश पर होने वाली जांच का दायर किसी राज्य की सीमा की बंदिश में नहीं आएगा। जरूरत पड़ने पर किसी भी राज्य में जांच हो सकती है।