प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत का कड़ा विरोध किया है। ईडी ने नया हलफनामा देकर कहा है कि चुनाव प्रचार का अधिकार न तो मौलिक, न सांविधानिक और न ही विधिक है। ऐसे में चुनाव प्रचार के लिए केजरीवाल को अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती।
जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ इस मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाने वाली है। फैसले से एक दिन पहले ईडी की उपनिदेशक भानुप्रिया मीणा की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा है, उनकी जानकारी में किसी भी नेता को प्रचार के लिए जमानत नहीं दी गई है, भले ही वह चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी ही क्यों न हो। केजरीवाल तो चुनाव भी नहीं लड़ रहे हैं।
ईडी ने कहा, बीते पांच वर्षों में 123 चुनाव हुए हैं। ऐसे में अगर प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी जाती है, तो किसी राजनेता को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, न ही न्यायिक हिरासत में रखा जा सकता है, क्योंकि चुनाव पूरे साल होते रहते हैं। संघीय ढांचे में कोई भी चुनाव दूसरे चुनाव से कम महत्वपूर्ण नहीं है। ऐसे में हर राजनेता तर्क दे सकता है कि अगर उसे जमानत नहीं मिली, तो अपूरणीय क्षति होगी। हलफनामे के अनुसार, धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत कई नेता न्यायिक हिरासत में हैं, उनकी हिरासतों पर अदालतों ने मुहर लगाई है। कई नेता दूसरे मामलों में भी जेल में हैं। किसी भी नेता के साथ विशेष व्यवहार नहीं किया जा सकता। आप के संयोजक केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था और अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली की अदालत ने उन्हें 20 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा है।
समन नजरअंदाज करते रहे
ईडी ने हलफनामे में कहा है, केजरीवाल पहले भेजे समन नजरअंदाज करते रहे। ऐसे में उनका यह तर्क कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया, अपने आप में विरोधाभासी है। केजरीवाल की विधिक टीम ने कहा कि हलफनामा तब दाखिल किया गया, जब शीर्ष कोर्ट फैसला देने वाली है। इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
कानून के शासन का उल्लंघन
ईडी ने कहा, तथ्यात्मक व कानूनी पहलुओं को देखते हुए अंतरिम जमानत का अनुरोध खारिज किए जाने योग्य है क्योंकि यह न सिर्फ स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि कानून के शासन का भी उल्लंघन है, जो हमारे संविधान का मूल चरित्र है।
आम लोगों से ऊपर होने का दावा नहीं कर सकते नेता
ईडी ने कहा, नेता खुद को आम लोगों से ऊपर विशेष दर्जे का दावा नहीं कर सकते हैं। अगर चुनाव प्रचार को अंतरिम जमानत का आधार माना गया, तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा। दूसरे मामलों में जेल में बंद नेता भी यह कहते हुए समान व्यवहार की मांग करेंगे कि राजनेताओं का अपना अलग वर्ग है। दूसरे नागरिकों के साथ यह पक्षपात होगा। किसी मजदूर या छोटे व्यापारी के काम को चुनाव प्रचार के काम से कम करके नहीं आंका जा सकता। केजरीवाल ने आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए याचिका दायर की है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले बुधवार को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए कहा था कि जमानत पर अंतरिम आदेश शुक्रवार को सुनाया जाएगा। इसके अलावा गिरफ्तारी को चुनौती देने से संबंधित मुख्य मामले पर भी उसी दिन सुनवाई की जाएगी।
इसके जवाब में प्रवर्तन निदेशालयन ने कहा था कि अंतरिम जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए क्योंकि यह कानून के विपरीत फैसला होगा और इससे कानून के शासन का उल्लंघन होगा। ईडी ने आगे कहा कि कोई कितने भी बड़े कद हो लेकिन वह कानून से ऊपर नहीं हो सकता।