सरकार के प्रयासों से भारत में कम वजन वाले और मंदबुद्धि बच्चों की संख्या में तो उल्लेखनीय कमी हुई है। लेकिन पिछले एक दशक के दौरान बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) और बरबादी पर लगाम लगाने में नाकाम होने की वजह से इस समस्या पर काबू नहीं पाया जा सका है।
यही वजह है कि अभी भी देश में कुपोषित बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है और इस पर तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। यह मानना है नीति आयोग का। देश के प्रमुख थिंक टैंक नीति आयोग से मंगलवार को जारी एक बयान के मुताबिक इसे एक व्यापक पोषण रणनीति और कार्यान्वयन संरचना विकसित करने की जिम्मेदारी मिली है।
यह भारत में कुपोषण की वर्तमान दर को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुपोषण जैसे महत्वपूर्ण मसले को चर्चा के केन्द्र में लाने के लिए आयोग ने बीते दिन एक कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें केन्द्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और एनआईएन जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ भी शामिल हुए थे।